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मुंगेर भूमि विवाद पर विधान परिषद में बवाल: ‘भूमि माफिया’ पर कार्रवाई की मांग, 14 दिन में मापी पूरी कराने का ऐलान

 
मुंगेर भूमि विवाद पर विधान परिषद में बवाल: ‘भूमि माफिया’ पर कार्रवाई की मांग, 14 दिन में मापी पूरी कराने का ऐलान
Bihar news: बिहार विधान परिषद में बुधवार को मुंगेर जिले के टेटिया बंबर अंचल में जमीन मापी को लेकर चल रहे विवाद ने जोरदार राजनीतिक रूप ले लिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 18 सदस्यों ने सदन में एक सुर में भूमि माफिया पर सख्त कार्रवाई की मांग की और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।

भाजपा के विधान पार्षद अनिल कुमार और कांग्रेस के एमएलसी समीर कुमार ने आरोप लगाया कि इलाके में भूमि माफिया का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे खुलेआम प्रशासनिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। सदस्यों ने कहा कि वैध जमीन मापी कराने पहुंचे अमीन के माध्यम से संबंधित परिवार को धमकियां दी गईं और यहां तक कि गोली मारने की धमकी भी दी गई।

“बड़े नेताओं का हाथ” होने का आरोप

सदन में यह भी कहा गया कि मापी प्रक्रिया को जानबूझकर रोका जा रहा है और पीड़ित परिवार को डराया-धमकाया जा रहा है। आवश्यक दस्तावेज जमा होने के बावजूद जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे विवाद सामाजिक तनाव का रूप ले सकते हैं।

मंत्री का सख्त रुख

मामले पर जवाब देते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिंहा ने सदन को भरोसा दिलाया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

मंत्री ने घोषणा की कि पूरे मामले की जांच प्रधान सचिव के माध्यम से कराई जाएगी। मुंगेर के जिलाधिकारी और प्रमंडलीय आयुक्त से 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही 14 दिनों के अंदर जमीन मापी का कार्य हर हाल में पूरा कराने का निर्देश दिया गया है।

इसके लिए 15 सदस्यीय टीम गठित कर स्थल जांच कर प्रतिवेदन सौंपने को कहा गया है। जान से मारने की धमकी के मामलों में लिखित शिकायत मिलने पर पुलिस सुरक्षा देने का भी आश्वासन दिया गया।

सरकार का संदेश साफ

मंत्री विजय सिन्हा ने दो टूक कहा कि भूमि विवाद की आड़ में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तय समयसीमा के भीतर जमीन मापी पूरी होती है या नहीं, और क्या भूमि माफिया के खिलाफ वाकई ठोस कार्रवाई होती है।