पीएम पोषण योजना में ट्रांसफर पर बवाल: बिना अनुमोदन बदले गए साधन सेवी, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
Bihar news: बिहार के भागलपुर से शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। पीएम पोषण योजना के तहत प्रखंड साधन सेवी के स्थानांतरण में नियमों को दरकिनार करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि वरीय पदाधिकारी के अनिवार्य अनुमोदन के बिना ही स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (आरडीडी), भागलपुर प्रमंडल ने जांच शुरू कर दी है, जबकि शिक्षा विभाग मुख्यालय, पटना से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
नियमों की अनदेखी का आरोप
आरडीडी भागलपुर ने ज्ञापांक 965, दिनांक 13 दिसंबर 2025 के तहत जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) भागलपुर को पत्र भेजकर बताया कि पीएम पोषण योजना के तहत कार्यरत कुछ प्रखंड साधन सेवी ने लिखित शिकायत दी है। शिकायत में कहा गया है कि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ), पीएम पोषण योजना भागलपुर ने ज्ञापांक 1128, दिनांक 26 नवंबर 2025 के जरिए स्थानांतरण आदेश जारी किया, जबकि इसके लिए वरीय अधिकारी की स्वीकृति नहीं ली गई। संबंधित कर्मियों ने इसे नियम विरुद्ध बताते हुए जांच की मांग की है।
फाइलों की जांच, अधिकारियों से पूछताछ
शिकायत के आधार पर आरडीडी ने 11 दिसंबर 2025 को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कार्यालय में पहुंचकर स्थानांतरण से जुड़ी संचिकाओं की जांच की। इस दौरान संचिका प्रभारी मोहम्मद मुजाहिदी निशार से भी पूछताछ की गई। जब जिला कार्यक्रम प्रबंधक से यह पूछा गया कि क्या स्थानांतरण से पहले जिला शिक्षा पदाधिकारी का अनुमोदन लिया गया था, तो उन्होंने वर्ष 2013 की एक नियमावली का हवाला दिया।
पुराने रिकॉर्ड ने खोली पोल
आरडीडी द्वारा जब पुराने अभिलेख खंगाले गए तो सामने आया कि वर्ष 2022 में हुए प्रखंड साधन सेवी के स्थानांतरण में जिला शिक्षा पदाधिकारी का विधिवत अनुमोदन लिया गया था। इतना ही नहीं, शिक्षा विभाग की अधिसूचना संख्या 939, दिनांक 23 जून 2011 का उल्लेख करते हुए आरडीडी ने स्पष्ट किया कि विभागों के एकीकरण के बाद साधन सेवी के स्थानांतरण का संपूर्ण अधिकार डीईओ को दिया गया है और बिना उनकी स्वीकृति के कोई भी स्थानांतरण नियमसंगत नहीं है।
तीन दिन में रिपोर्ट तलब
मामले ने तूल पकड़ा तो बिहार सरकार के शिक्षा विभाग अंतर्गत मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय के निदेशक विनायक मिश्रा ने भी संज्ञान लिया। उन्होंने ज्ञापांक 3454, दिनांक 22 दिसंबर 2025 के तहत जिला शिक्षा पदाधिकारी को तीन दिनों के भीतर अद्यतन स्थिति की रिपोर्ट शिक्षा विभाग मुख्यालय, पटना भेजने का निर्देश दिया है।
डीईओ के बयान से बढ़ी उलझन
इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब जिला शिक्षा पदाधिकारी राजकिशोर शर्मा ने कहा कि साधन सेवी के स्थानांतरण की फाइल जिलाधिकारी के पास भेजी गई है और इस प्रक्रिया में डीईओ के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ही इसके सक्षम प्राधिकारी हैं। हालांकि यह बयान विभागीय अधिसूचना और पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता।
कई सवाल, कई संदेह
इस प्रकरण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जब विभागीय अधिसूचना में डीईओ की स्वीकृति अनिवार्य है तो 2025 में इसका पालन क्यों नहीं हुआ? 2022 में अनुमोदन लिया गया था, फिर इस बार नियम क्यों बदले गए? स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद फाइल जिलाधिकारी को भेजने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
जल्दबाजी में लिया गया फैसला?
सूत्रों की मानें तो संबंधित डीपीओ ने सेवानिवृत्ति से ठीक पहले जल्दबाजी में यह स्थानांतरण आदेश जारी किया। यदि समय रहते डीईओ से अनुमोदन लिया जाता तो विवाद की स्थिति नहीं बनती। वहीं, यह भी चर्चा है कि एक जिला कार्यक्रम प्रबंधक वर्षों से एक ही जिले में पदस्थापित हैं, जबकि हाल के चुनावों के बाद चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार लंबे समय से एक स्थान पर जमे अधिकारियों का स्थानांतरण होना चाहिए था।
फिलहाल आरडीडी स्तर पर जांच जारी है। शिक्षा विभाग मुख्यालय से रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह लापरवाही थी या नियमों की जानबूझकर अनदेखी।







