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कर्नाटक में वीआईपी की दस्तक, 2028 चुनाव लड़ने का ऐलान; मुकेश सहनी बोले- दिल्ली की सत्ता में भागीदारी तक जारी रहेगी लड़ाई

 
कर्नाटक में वीआईपी की दस्तक, 2028 चुनाव लड़ने का ऐलान; मुकेश सहनी बोले- दिल्ली की सत्ता में भागीदारी तक जारी रहेगी लड़ाई
Bihar news: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक एवं बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने निषाद समाज के अधिकार और आरक्षण की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का संकल्प दोहराते हुए पार्टी के दक्षिण भारत में विस्तार का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के बाद अब कर्नाटक में भी वीआईपी ने संगठनात्मक आधार तैयार कर लिया है और आने वाले समय में इसे एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में विकसित किया जाएगा।

मीडिया से बातचीत के दौरान सहनी ने बताया कि कर्नाटक में निषाद समुदाय की बड़ी आबादी निवास करती है, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘गंगापुत्र’ के नाम से जाना जाता है। पार्टी ने राज्य में संगठन को मजबूत करने के लिए बी.के. मोहन को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि वीआईपी वर्ष 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी और इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है।

केंद्र की राजनीति को लेकर भी सहनी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान तभी संभव होगा, जब राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ेगी। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में नई राजनीतिक परिस्थिति बनेगी, जिससे वंचित और पिछड़े समाज की मांगों को मजबूती मिलेगी।

वीआईपी प्रमुख ने केंद्र सरकार पर आर्थिक मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, जबकि युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाकर राजनीतिक प्रबंधन में अधिक व्यस्त है।

बिहार की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए सहनी ने विपक्षी नेताओं से जुड़े हालिया विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों और नेताओं को अपनी बात रखने का अधिकार है तथा सामाजिक न्याय और अधिकारों की लड़ाई को दबाने के प्रयास सफल नहीं होंगे।

कर्नाटक में पार्टी के विस्तार और 2028 चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ वीआईपी ने साफ संकेत दे दिया है कि वह आने वाले वर्षों में खुद को केवल बिहार तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।