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जहां कभी थी बंजर जमीन, आज वहीं लहरा रही स्ट्रॉबेरी और तरबूज की फसल, रोहतास के किसानों ने रच दी नई मिसाल

 
Bihar news

Bihar news: कहते हैं मेहनत और सही दिशा मिल जाए तो बंजर जमीन भी सोना उगलने लगती है। बिहार के रोहतास जिले के महादेवा गांव के किसानों ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। कभी जो पहाड़ी और जंगली जमीन बेकार पड़ी रहती थी, आज वहीं स्ट्रॉबेरी, तरबूज और खरबूजों की लहलहाती फसलें दिखाई दे रही हैं। इस खेती से किसान लाखों रुपये कमा रहे हैं और आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

सरकार के सहयोग से बदली किस्मत
करीब सात साल पहले राज्य सरकार की जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत किसानों को सिंचाई की सुविधा और आधुनिक तकनीक का सहयोग मिला। इसके बाद महादेवा गांव के करीब 100 किसानों ने मिलकर लगभग 150 एकड़ बंजर और जंगली जमीन को खेती योग्य बना दिया। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई की मदद से यहां अब उन्नत खेती हो रही है।

प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख की कमाई
किसान तरबूज और खरबूजा की खेती से प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि गांव में रोजगार के नए मौके भी बने हैं। पहले जो किसान मजदूरी के लिए बाहर जाते थे, अब वे अपने ही खेत में अच्छी आमदनी कर रहे हैं।

जहां घास नहीं उगती थी, अब स्ट्रॉबेरी की खेती
सरकार की ओर से बोरवेल और सबमर्सिबल पंप मिलने के बाद गांव के 15 किसानों ने मिलकर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है। करीब 25 एकड़ जमीन पर हो रही इस खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है। इसके साथ ही धान, गेहूं और सब्जियों की जैविक खेती भी तेजी से बढ़ रही है।

दूसरे जिलों के लिए बनी प्रेरणा
महादेवा गांव की यह कहानी अब आसपास के गांवों और दूसरे जिलों के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर खेती से लाखों कमाने का यह प्रयोग साबित करता है कि सही योजना, सरकारी सहयोग और मेहनत से खेती में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।