विश्व बाल श्रम निषेध दिवस: बच्चों के हाथों में किताबें हों, औजार नहीं- विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित पोषण और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। बच्चों से मजदूरी कराना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है और इससे देश के भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार बाल श्रम समाप्त करने तथा बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, समग्र शिक्षा अभियान, मध्याह्न भोजन योजना और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके बच्चों की स्थिति से आंकी जाती है। यदि बच्चे शिक्षित, स्वस्थ और सुरक्षित होंगे तो देश का भविष्य भी मजबूत और समृद्ध होगा। उन्होंने समाज के सभी वर्गों—अभिभावकों, शिक्षकों, उद्योग जगत और सामाजिक संगठनों—से बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
विधानसभा अध्यक्ष ने नागरिकों से अपील की कि वे बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें शिक्षा से जोड़ने में प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथों में मजदूरी के औजार नहीं, बल्कि पुस्तकें और कलम होनी चाहिए। यही विकसित और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है।
डॉ. प्रेम कुमार ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए कार्यरत सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से ही बाल श्रम मुक्त समाज का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।







