31 साल पुराने दरभंगा हत्याकांड में बड़ा फैसला: चर्चित अधिवक्ता अंबर इमाम हाशमी समेत पांच दोषी, कोर्ट ने भेजा जेल
Darbhanga crime news: दरभंगा व्यवहार न्यायालय से बुधवार को 31 साल पुराने बहुचर्चित हत्याकांड में बड़ा फैसला सामने आया। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने विशनपुर थाना क्षेत्र के बसंत गांव से जुड़े इस मामले में क्राइम के चर्चित अधिवक्ता व पूर्व लोक अभियोजक अंबर इमाम हाशमी और उनके भाई कौशर इमाम हाशमी समेत पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया। अदालत अब दोषियों की सजा के बिंदु पर 31 जनवरी 2026 को फैसला सुनाएगी।
यह मामला 8 अगस्त 1994 की शाम का है, जब मवेशियों को पानी पिलाने पहुंचे किसानों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। गोलीबारी में पटोरी गांव निवासी राम कृपाल चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के पीछे दो गांवों—बसंत और पटोरी—के बीच जमीन को लेकर पुराना विवाद था। एक पक्ष उस जमीन को श्मशान भूमि बता रहा था, जबकि दूसरा उसे रास्ता होने का दावा कर रहा था।
अभियोजन के अनुसार, उस शाम पटोरी गांव के किसान अपने भैंसों को गुणसार पोखर में पानी पिला रहे थे, तभी बसंत गांव की ओर से हथियारों से लैस 25 से अधिक लोग मौके पर पहुंचे और मवेशियों को जबरन ले जाने का प्रयास किया। विरोध करने पर फायरिंग शुरू कर दी गई, जिसमें राम कृपाल चौधरी की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए।
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि अदालत ने अंबर इमाम हाशमी, कौशर इमाम हाशमी, राजा हाशमी, मोबिन हाशमी और अंजार हाशमी को मानव हत्या का दोषी पाया है। यह फैसला विशनपुर थाना कांड संख्या 58/1994 से जुड़े सत्रवादों की लंबी सुनवाई के बाद आया है।
इस केस के ट्रायल में 31 साल का लंबा समय लगा। इस दौरान प्राथमिकी में नामजद आधा दर्जन से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है, वहीं गोली लगने से घायल एक युवक की भी बाद में मौत हो गई थी। 32वें वर्ष में जाकर आए इस फैसले को इलाके में न्याय की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।
रिपोटर: तुलसी झा, दरभंगा







