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IGIMS में आयुष्मान योजना में बड़ा घोटाला, फर्जी मरीज बनाकर लाखों की निकासी का आरोप, जानिए पूरा मामला

 
IGIMS में आयुष्मान योजना में बड़ा घोटाला, फर्जी मरीज बनाकर लाखों की निकासी का आरोप, जानिए पूरा मामला
Bihar news: राजधानी पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों से फर्जी मरीजों और डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी राशि की निकासी की जा रही थी। अब तक लगभग 45 लाख रुपये के गबन की आशंका जताई गई है।

सूत्रों के अनुसार अस्पताल में कुछ मरीजों को कैश भुगतान वाला मरीज दिखाकर उनसे नकद राशि ली जाती थी, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हीं मरीजों को आयुष्मान योजना के लाभार्थी के रूप में दर्ज कर क्लेम की राशि निकाल ली जाती थी। इस तरह एक ही मरीज के नाम पर दोहरी वसूली का खेल चल रहा था।

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और संस्थान प्रशासन में हड़कंप मच गया। पूरे प्रकरण की जांच के लिए छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। प्रशासनिक भवन में अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों से कई घंटों तक पूछताछ की गई। जांच के दौरान तकनीकी रिकॉर्ड, लॉग फाइल और ट्रांजैक्शन डाटा की भी पड़ताल की गई।

बताया जा रहा है कि आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़े कुछ कर्मचारियों के कंप्यूटर सिस्टम और डिजिटल डाटा को जांच टीम ने कब्जे में लिया है। अधिकारियों को आशंका है कि घोटाले का दायरा शुरुआती अनुमान से कहीं अधिक हो सकता है।

इस बीच पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। कई संविदा कर्मियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की संलिप्तता रही।

घोटाले का खुलासा तब हुआ जब एक व्यक्ति ने अपने आयुष्मान कार्ड के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि उसके नाम पर इलाज और भुगतान दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में न तो इलाज हुआ और न ही लाभार्थी को कोई राशि मिली।

अब स्वास्थ्य विभाग राज्यभर में आयुष्मान योजना से जुड़े रिकॉर्ड का ऑडिट कराने की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल डाटा की विस्तृत जांच के बाद और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह मामला सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।