बिहार मूल के उद्योगपति अनिल अग्रवाल पर ED का शिकंजा! वेदांता ग्रुप के कई ठिकानों पर छापेमारी
सूत्रों के मुताबिक, ईडी की टीम विदेशी लेनदेन और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। एजेंसी को विदेशी मुद्रा नियमों के संभावित उल्लंघन की आशंका है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, विदेशी निवेश और विदेशों में हुए ट्रांजैक्शन की पड़ताल की जा रही है।
वेदांता ग्रुप की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। समूह ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारियों को मांगी गई सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं और कंपनी सभी कानूनी नियमों के अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि वेदांता देश की सबसे बड़ी खनन और धातु कंपनियों में गिनी जाती है। एल्युमिनियम और जिंक उत्पादन के क्षेत्र में कंपनी की मजबूत पकड़ है, जबकि कच्चे तेल के उत्पादन में भी उसका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। समूह ने हाल के वर्षों में भारत में बड़े निवेश और औद्योगिक विस्तार की योजनाओं का भी ऐलान किया है।
हालांकि वेदांता पहले भी कई विवादों को लेकर सुर्खियों में रह चुकी है। अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ के एक पावर प्लांट में हुए बॉयलर विस्फोट में 20 से अधिक मजदूरों की मौत के बाद कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके अलावा ओडिशा में बिना अनुमति नदी से पानी लेने के आरोप में कंपनी पर 233 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया था।
विदेशी मुद्रा नियमों को लेकर भी समूह पहले जांच का सामना कर चुका है। वर्ष 2004 में वेदांता समूह की एक कंपनी और उसके निदेशकों पर FEMA नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन पर आर्थिक दंड भी लगाया गया था।
दरअसल, FEMA के तहत ईडी तब कार्रवाई करती है जब किसी व्यक्ति या कंपनी पर विदेशों में अवैध धन भेजने, हवाला कारोबार, विदेशी निवेश नियमों के उल्लंघन या विदेश में संपत्ति खरीद से जुड़े नियम तोड़ने का संदेह होता है।
अनिल अग्रवाल का बिहार से गहरा जुड़ाव माना जाता है। वे समय-समय पर बिहार में उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों को लेकर अपनी राय रखते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी उन्होंने कई बार बिहार की प्रतिभा और राज्य की औद्योगिक संभावनाओं की खुलकर सराहना की है।







