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अररिया में फर्जी आधार कार्ड रैकेट का भंडाफोड़: लैपटॉप व आई-स्कैनर के साथ दो गिरफ्तार

 
अररिया में फर्जी आधार कार्ड रैकेट का भंडाफोड़: लैपटॉप व आई-स्कैनर के साथ दो गिरफ्तार

Bihar News: आधार कार्ड अवैध केंद्र के खुलासे को लेकर अररिया जिले के कुर्साकांटा थानाध्यक्ष रोहित कुमार ने बताया कि पुलिस को पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी कि बाड़ी टोला वार्ड संख्या 05 स्थित एक घर में बिना किसी सरकारी अनुमति के बाईपास सिस्टम के जरिए अवैध रूप से आधार कार्ड बनाने का खेल चल रहा है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने चिन्हित ठिकाने पर अचानक दबिश दी. पुलिस की गाड़ियों को दरवाजे पर देखते ही भीतर फर्जी कार्ड बना रहे दोनों ऑपरेटर कमरे की खिड़की फांदकर भागने लगे. हालांकि, मुस्तैद पुलिस बल ने घेराबंदी करते हुए काफी मशक्कत के बाद दोनों आरोपियों को खदेड़कर मौके पर ही दबोच लिया.

पुलिस अभिरक्षा में लिए गए दोनों आरोपियों की पहचान की गई है. जिसमें मोहम्मद आरिफ (पिता- मोहम्मद अयूब), निवासी- बाड़ी टोला, कुर्साकांटा और मोहम्मद आबिद (पिता- कलरू उर्फ रकीमुद्दीन), निवासी- वार्ड संख्या 10, कुर्साकांटा है. घटनास्थल की तलाशी के दौरान पुलिस ने अवैध केंद्र से भारी मात्रा में तकनीकी सामग्रियां बरामद की हैं, जिनका उपयोग फर्जी कार्ड बनाने में किया जा रहा था. जब्त सामानों में एक आधुनिक लैपटॉप, एक हाई-टेक आई स्कैनर (आंखों को स्कैन करने वाली मशीन), एक प्रिंटर और कई संदिग्ध दस्तावेज शामिल हैं.

उक्त मामले की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस बड़े सिंडिकेट का पता चलते ही अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुशील कुमार गुरुवार को खुद कुर्साकांटा थाना पहुंचे. उन्होंने दोनों धंधेबाजों से बंद कमरे में घंटों सघन पूछताछ की. इसके साथ ही मामले के तार अंतरराष्ट्रीय या अंतर-जिला गिरोह से जुड़े होने की आशंका को देखते हुए स्पेशल ब्रांच (खुफिया विभाग) की विशेष टीम भी कुर्साकांटा थाना पहुंची और जांच-पड़ताल की. अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान गिरोह के काम करने के तौर-तरीकों को लेकर कई चौंकाने वाले राज सामने आए हैं, जिन्हें अनुसंधान (जांच) की गोपनीयता के मद्देनजर फिलहाल गुप्त रखा गया है.

एसडीपीओ सुशील कुमार ने बताया कि जिले में फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज बनाने वाले रैकेट के खिलाफ लगातार बड़ी कार्रवाई की जा रही है. इससे पूर्व भी पलासी, जोकीहाट समेत जिले के अन्य हिस्सों से ऐसे ही अवैध धंधे में संलिप्त 09 शातिरों को जेल भेजा जा चुका है. डीएसपी ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि पुलिस इस पूरे नेटवर्क के ‘बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज’ (यानी इस गिरोह को तकनीक और फर्जी दस्तावेज कहां से मिल रहे थे और ये आगे किन लोगों को कार्ड बेच रहे थे) की गहराई से तफ्तीश कर रही है. उन्होंने साफ किया कि इस केंद्र से जिन भी लोगों ने पैसे देकर अपने कार्ड बनवाए या सुधरवाए हैं, पुलिस उन सभी को चिन्हित कर पूछताछ करेगी. फर्जी तरीके से बने दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वाले तत्वों को भी किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.