लौरिया चीनी मिल बंद होते ही भड़के किसान, गन्ना लदे ट्रैक्टरों से NH-727 जाम
किसानों ने अपने ट्रैक्टर-ट्रेलर सड़क पर खड़ा कर आवागमन पूरी तरह बाधित कर दिया। उनका कहना था कि इलाके के कई खेतों में अभी भी काफी गन्ना खड़ा है, इसके बावजूद मिल प्रबंधन ने अचानक पेराई सत्र खत्म कर दिया। किसानों का आरोप था कि उन्हें मिल बंद होने की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, इसलिए वे गन्ना लेकर मिल पहुंच गए।
किसानों का कहना था कि वे लौरिया चीनी मिल के आरक्षित क्षेत्र के किसान हैं और उनका गन्ना लेना मिल प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा
सड़क जाम की खबर मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रखंड विकास पदाधिकारी संजीव कुमार, थानाध्यक्ष रमेश कुमार शर्मा और जदयू जिलाध्यक्ष कन्हैया कुशवाहा ने किसानों से बातचीत कर हालात को शांत कराने की कोशिश की।
अधिकारियों ने किसानों की शिकायतें सुनने के बाद मिल प्रबंधन से बातचीत की। इसके बाद उत्तर बिहार के सहायक ईख आयुक्त रेमंत झा के निर्देश पर किसानों को राहत देते हुए शाम छह बजे तक के लिए मिल का गेट फिर से खोल दिया गया।
गेट खुलने के बाद किसानों ने जाम हटाया और गन्ने की तौल प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई।
मिल प्रबंधन ने दी सफाई
वहीं इस पूरे मामले में मिल प्रबंधन का कहना है कि पेराई सत्र खत्म होने की जानकारी किसानों को पहले ही दे दी गई थी। मिल के जीएम सुमित भाटी और महाप्रबंधक (गन्ना) विनोद कुमार राठी के मुताबिक किसानों को एसएमएस और नोटिस के जरिए सूचना दी गई थी।
उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए दो दिन अतिरिक्त पेराई भी कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद कई किसान तय समय पर गन्ना नहीं ला सके, जिसके कारण मिल को बंद करना पड़ा।
रिपोटर: आशीष कुमार, पश्चिम चंपारण







