बच्चा चोरी की अफवाहों पर सख्ती: ADG अमित कुमार जैन बोले– “भीड़ न बनें, तुरंत पुलिस को दें सूचना”
पटेल भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने साफ कहा कि अफवाहों पर ध्यान देने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और निर्दोष लोग भीड़ का शिकार हो सकते हैं।
पांच शिकायतें, सब निकलीं अफवाह
एडीजी ने बताया कि पिछले दो दिनों में जमुई, पूर्णिया, नालंदा और मुजफ्फरपुर से बच्चा चोरी की कुल पांच शिकायतें मिलीं। जांच के बाद सभी मामले अफवाह साबित हुए।
उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरें तेजी से फैलती हैं, जिससे मौके पर भीड़ जुट जाती है और मॉब लिंचिंग जैसी स्थिति बन जाती है। ऐसे हालात में निर्दोष व्यक्ति भी हिंसा का शिकार हो सकते हैं।
2025 में 14,699 गुमशुदगी के मामले
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 14,699 बच्चों के गुम होने के मामले दर्ज किए गए। इनमें 12,526 बालिकाएं और 2,173 बालक शामिल थे। अब तक 7,772 बच्चों को सकुशल बरामद किया जा चुका है, जबकि 6,927 मामलों की जांच जारी है।
एडीजी ने बताया कि यदि कोई बच्चा 24 घंटे तक लापता रहता है, तो प्राथमिकी दर्ज करना अनिवार्य है। चार महीने तक पता नहीं चलने पर मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) को स्थानांतरित कर दिया जाता है, जो सभी जिलों में सक्रिय है।
‘Vatsalya Portal’ से राज्यों में समन्वय
भारत सरकार के ‘वात्सल्य पोर्टल’ के जरिए सभी राज्यों के थाने आपस में जुड़े हैं। यदि बिहार का कोई बच्चा दूसरे राज्य में मिलता है, तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित पुलिस को मिल जाती है और बच्चे को परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाया जाता है।
डायल 112 पर दें सूचना
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अफवाह या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत डायल 112 या नजदीकी थाने को दें। कानून को हाथ में लेने से स्थिति और बिगड़ सकती है।
पुलिस मुख्यालय ने दोहराया है कि हर शिकायत की गंभीरता से जांच की जाएगी, लेकिन अफवाह फैलाने वालों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।







