जॉइनिंग लेटर से जुड़ी खबर पर विभाग का खंडन, अभ्यर्थी बोलीं- काम के घंटे और रहने की व्यवस्था से थी परेशानी
Newshaat Desk: बिहार में रोजगार मेले के जरिए नौकरी पाने वाली एक अभ्यर्थी को लेकर प्रकाशित खबर पर युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच में खबर के कई दावे तथ्यहीन और भ्रामक पाए गए हैं। मामले में संबंधित अभ्यर्थी से भी जानकारी ली गई है, जिन्होंने अपने पति के साथ विभाग के अधिकारियों के सामने लिखित बयान दर्ज कराया है।
मामला दैनिक भास्कर डिजिटल में प्रकाशित उस खबर से जुड़ा है, जिसमें अभ्यर्थी को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। खबर सामने आने के बाद विभाग ने मामले की पड़ताल शुरू की और अभ्यर्थी से सीधे संपर्क किया।
अभ्यर्थी ने क्या कहा?
विभाग के सामने दिए लिखित बयान में अभ्यर्थी ने प्रकाशित खबर के तरीके पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि पत्रकार से बातचीत के दौरान उन्होंने जिस समस्या का जिक्र किया था, उसे कथित तौर पर अलग अर्थ में पेश किया गया।
अभ्यर्थी के मुताबिक, जिस कंपनी में उनका चयन हुआ था, वहां निर्धारित समय से अधिक काम लिए जाने और रहने की उचित व्यवस्था नहीं होने को लेकर उनकी शिकायत थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने बातचीत में किसी तरह के यौन शोषण की बात नहीं कही थी।
अभ्यर्थी ने यह भी कहा कि उनकी बात को अलग तरीके से प्रकाशित किए जाने से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
रोजगार मेले में हुआ था चयन
दरअसल, बिहार सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए 19 से 23 अगस्त 2026 तक पटना के ज्ञान भवन में रोजगार मेले का आयोजन किया गया था। विभाग के अनुसार, मेले में अलग-अलग कंपनियों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों का चयन किया था।
इसी दौरान हेकम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने संबंधित अभ्यर्थी का चयन आईसीयू नर्स (जीएनएम) के पद के लिए किया था।
दस्तावेजों के आधार पर जांच कर रहा विभाग
विभाग का कहना है कि पूरे मामले की जांच केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर नहीं की जा रही है। इसके लिए अभ्यर्थी का लिखित बयान, रोजगार मेले से जुड़े रिकॉर्ड, चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज और कंपनी से जुड़े अभिलेखों को भी देखा जा रहा है।
प्राथमिक जांच में प्रकाशित खबर में किए गए दावों और अभ्यर्थी की ओर से विभाग को दिए गए लिखित बयान में अंतर सामने आने की बात कही गई है। विभाग ने संकेत दिया है कि उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाएगी।







