बेहद खतरनाक है Triglyceride! जानिए क्यों बढ़ता है खतरा और कैसे करें कंट्रोल
Health News: Triglyceride शरीर में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट (वसा) है. जब हम जरूरत से ज्यादा कैलोरी, मीठा या तला-भुना भोजन खाते हैं, तो शरीर अतिरिक्त ऊर्जा को ट्राइग्लिसराइड के रूप में जमा कर लेता है. इसका स्तर लंबे समय तक अधिक रहने पर कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

कितना होना चाहिए Triglyceride?
- सामान्य (Normal): 150 mg/dL से कम
- बॉर्डरलाइन हाई: 150–199 mg/dL
- हाई: 200–499 mg/dL
- बहुत ज्यादा (Very High): 500 mg/dL या उससे अधिक

Triglyceride बढ़ने के कारण
- ज्यादा चीनी और मिठाइयों का सेवन
- तला-भुना और जंक फूड
- मोटापा
- नियमित व्यायाम न करना
- अत्यधिक शराब का सेवन
- अनियंत्रित डायबिटीज
- हाइपोथायरॉयडिज्म
- कुछ दवाओं का प्रभाव
- आनुवंशिक कारण
बढ़ा हुआ Triglyceride क्यों खतरनाक है?
- हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है.
- धमनियों में फैट जमा होने (Atherosclerosis) की संभावना बढ़ती है.
- अग्न्याशय में सूजन (Pancreatitis) हो सकती है, खासकर जब स्तर 500 mg/dL से ऊपर हो.
- फैटी लिवर की समस्या हो सकती है.
- मेटाबोलिक सिंड्रोम और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है.
इसके लक्षण
अधिकांश लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते. इसलिए इसका पता केवल लिपिड प्रोफाइल ब्लड टेस्ट से चलता है. बहुत अधिक स्तर होने पर पेट में तेज दर्द (पैंक्रियाटाइटिस) जैसे लक्षण हो सकते हैं.

Triglyceride कैसे कम करें?
- रोज़ 30–45 मिनट तेज़ चाल से चलें या व्यायाम करें.
- मिठाई, कोल्ड ड्रिंक और शुगर वाले पेय कम करें.
- तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड से बचें.
- साबुत अनाज, हरी सब्जियां, फल और दालें खाएं.
- ओमेगा-3 युक्त मछली (जैसे सैल्मन, सार्डिन, मैकेरल) या डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट लें.
- वजन नियंत्रित रखें.
- शराब और धूम्रपान से बचें.
- यदि डॉक्टर दवा लिखें, तो नियमित रूप से लें.
कब डॉक्टर से मिलें?
यदि आपकी Triglyceride रिपोर्ट 200 mg/dL से अधिक है, या 500 mg/dL से ऊपर है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें. बहुत अधिक स्तर पैंक्रियाटाइटिस जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है और उपचार की आवश्यकता होती है. Triglyceride का बढ़ना अक्सर बिना किसी लक्षण के होता है, लेकिन यह हृदय रोग, स्ट्रोक, फैटी लिवर और पैंक्रियाटाइटिस जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है. संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराकर इसे नियंत्रित रखा जा सकता है.


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