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ब्रिटेन के ब्राइटन शहर में इस दो साल के बच्चे में दिखने लगे 'जवानी' के लक्षण
Report: Sakshi
 


अभी भी दुनिया की कई ऐसी जगह हैं, जहां पर प्यूबर्टी से संबंधित ज्यादा जानकारी नहीं हैं. दरअसल अर्ली प्यूबर्टी को प्रीकोशियस प्यूबर्टी भी कहा जाता है, जिसमें समय से पहले ही बच्चों में जवानी के लक्षण आने लगते हैं. ऐसे में ब्रिटेन के ब्राइटन शहर से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां दो साल के एक बच्चे में प्यूबर्टी के लक्षण दिखाई देने लगी है. वहीं बच्चे के प्राइवेट पार्ट्स के बाल बढ़ने लगे और उसके लिंग का आकार भी ऐबनॉर्मल रूप से बढ़ गया है. आश्चर्य की बात ये है की दो साल के बच्चे के साथ ऐसा होना कितना अजीव है. हालांकि इस तरह की समस्या का ज़िक्र मेडिकल लिटरेचर में कई बार किया गया है.

2 साल के बरनबी ब्राउनसेल की बोन डेंसिटी भी एक 4.5 साल के बच्चे जितनी हो गई है।

BBC के एक रिपोर्ट के मुताबिक, बरनबी ब्राउनसेल की मां एरिका ब्राउनसेल का कहना है कि 'उसकी लंबाई और वजन असामान्य रूप से बढ़ रही थी. एक साल की उम्र में बच्चे का वजन 12 किलो था. 12 से 18 महीने के बीच उसका वजन हर महीने 0.9 किलो बढ़ रहा था. शरीर में फैट नहीं था, ये केवल मांसपेशियां थीं. वहीं बरनबी की बोन डेंसिटी भी एक 4.5 साल के बच्चे जितनी हो गई है.

IFL साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला सामने आने के बाद बच्चे के ब्लड की जांच गई. ब्लड टेस्ट में सामने आया कि बच्चे में सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन का स्तर काफी ज्यादा था. यह हार्मोन पुरुषों में अधिक मात्रा में बनता है, लेकिन एक बच्चे में हार्मोन का स्तर इतना ज्यादा मिलना चौंकाने वाला है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि बच्चे में ये बदलाव अपने पिता पीटर ब्राउनसेल के आर्टिफिशियल टेस्टोस्टेरोन ट्रीटमेंट के संपर्क में आने से हुई है. 

पिता पीटर ब्राउनसेल के आर्टिफिशियल टेस्टोस्टेरोन जेल के संपर्क में आने से बरनबी के शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा काफी बढ़ गई है।

आपको बता दें कि डॉक्टर्स को बच्चे के शरीर में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन भारी मात्रा में मिला है. इसी वजह से उसमें इतनी कम उम्र में ही प्यूबर्टी के लक्षण देखने को मिलने लगा. बल्कि डॉक्टर्स के लिए चौंकाने वाली बात ये थी कि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ था और उसे कोई जन्मजात बीमारी भी नहीं थी.

इस मामले की जांच करने वाले डॉक्टरों का मानना है कि बच्चे की यह स्थिति आर्टिफिशियल टेस्टोस्टेरॉन के सम्पर्क में आने से हो सकती है. ऐसा इसलिए कहा गया क्योंकि बच्चे के पिता को टेस्टिस से जुड़ी गंभीर बीमारी थी. इसके लिए वो कई सालों से रोजाना स्किन पर टेस्टोस्टेरॉन जेल का इस्तेमाल कर रहे थे.