Newshaat_Logo

11 साल पुरानी योजना, आज भी अधूरी पाइपलाइन-बागबेड़ा में पानी के लिए हाहाकार...

Jamshedpur: ग्रामीणों का कहना है कि योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई, टंकी भी बनी, लेकिन पानी की नियमित आपूर्ति आज तक शुरू नहीं हो सकी. मजबूरन लोग कुएं, चापाकल और दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर हैं. कई जगहों पर भूजल स्तर गिरने से चापाकल भी जवाब देने लगे हैं.
 
Drinking-water-problem-in-bagbeda-jamshedpur-jharkhand

Jamshedpur: पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं है, बल्कि यह पूरे ब्रह्मांड की धड़कन है. इसलिए इसे हर एक जीवंत वस्तु के लिए अनमोल जीवन कहा जाता है. लेकिन जमशेदपुर शहर से सटे बागबेड़ा और आसपास इलाके की आबादी आज भी शुद्ध पानी के लिए आस लगाए बैठी है. इस इलाके में बोरिंग पानी के सहारे कई परिवार जीवन यापन कर रहे हैं. कुछ क्षेत्र में समाजसेवी और अन्य संगठन द्वारा टैंकर से पानी भिजवाते हैं. जिसे लेने के लिए घर की महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग लाइन मेें लगते हैं. कुछ लोग तो खरीदकर पानी पीते हैं.

Villagers protest when the tap water scheme is disrupted

बागबेड़ा क्षेत्र में पेयजल संकट 11 वर्षों बाद भी जस का तस बना हुआ है. सरकार द्वारा शुरू की गई बहुप्रचारित जलापूर्ति योजना आज तक धरातल पर पूरी तरह नहीं उतर सकी है, जिससे हजारों ग्रामीणों को अब भी शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है. गर्मी के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई, टंकी भी बनी, लेकिन पानी की नियमित आपूर्ति आज तक शुरू नहीं हो सकी। मजबूरन लोग कुएं, चापाकल और दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर हैं। कई जगहों पर भूजल स्तर गिरने से चापाकल भी जवाब देने लगे हैं

यहां जल का स्तर भी काफी नीचे चला गया है. 800 फीट गहराई में भी पानी मिलना नसीब की बात है. जल स्तर नीचे चले जाने के कारण सरकारी चापाकल बेकार पड़े हैं. कहीं-कहीं मुखिया द्वारा जलमीनार बनवाया गया है, जहां नियमित समय पर लाइन से पानी लेना पड़ता है.

जलापूर्ति योजना पूरी क्यों नहीं हुई

2005 में सप्लाई पानी के लिए बागबेड़ा महानगर विकास समिति के बैनर तले आंदोलन की शुरुआत हुई. 793 बार हुए आंदोलन के जरिए जिला मुख्यालय, मंत्री, विधायक, मुख्यमंत्री, राज्यपाल तक को ज्ञापन सौंपा गया. 2012 में जमशेदपुर से रांची पद यात्रा कर विधानसभा का घेराव भी किया गया. जिसके बाद 18 अप्रैल 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 237 करोड़ 21 लाख की बागबेड़ा गोविंदपुर वृहत ग्रामीण जलापूर्ति योजना का शिलान्यास किया.

योजना के तहत 2018 में घर-घर तक सप्लाई पानी देने का निर्धारित समय तय हुआ. वर्ल्ड बैंक का 50%, केंद्र सरकार 33%, राज्य सरकार 16%, जनता का 1% के राशि से योजना पूरी होनी थी. 2018 तक काम नहीं हुआ और इसी बीच सरकार बदल गई. फिर साल 2020 में काम बंद हो गया. जिसके विरोध में फिर आंदोलन शुरू हुआ.

drinking-water-problem-in-bagbeda-jamshedpur

इस आंदोलन की आवाज दिल्ली तक पहुंचाने के लिए पैदल यात्रा शुरू हुई, लेकिन रांची पहुंचने से पहले पैदल यात्रा कर रहे आंदोलनकारियों को रोक दिया गया. इस दौरान राज्य अभियंता प्रमुख द्वारा लिखित आश्वासन दिया गया कि इस साल काम पूरा हो जाएगा. इस मामले को जमशेदपुर के सांसद ने लोकसभा में भी उठाया.

2022 में ILFS को ब्लैक लिस्टेड कर इस योजना के लिए फिर से नया टेंडर निकाला गया. जिसमें बागबेड़ा जलापूर्ति के लिए प्रस्तावित 104 करोड़ के अलावा अतिरिक्त राशि 50 करोड़ 58 लाख प्रस्तावित किया गया. लेकिन 15 माह के बाद योजना अधर में लटक गई. जिसके बाद लोगों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. पानी के लिए 2022 में झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई. 2023 में पेयजल स्वच्छता विभाग के सचिव ने 2026 तक योजना पूरा करने की बात कही लेकिन 2026 में भी काम अधूरा है.

drinking-water-problem-in-bagbeda-jamshedpur

पानी के लिए आंदोलन करने वाले सुबोध झा बताते हैं कि क्षेत्र की जनता को बार-बार ठगा गया है. सरकार प्रशासन यहां तक कि विधायक कोई भी सुध लेने वाला नहीं है. अब हमें न्यायालय और प्रधानमंत्री से उम्मीद की आस है. सुबोध झा का कहना है कि यहां पैसे की लूट हुई है, इसकी जांच होनी चाहिए. बुजुर्ग महिला बताती हैं कि उसका पूरा परिवार इसी क्षेत्र में रहता है. हमें पानी खरीदकर पीना पड़ता है. नदी के पानी का इस्तेमाल अन्य काम के लिए लाते हैं.

बता दें कि गोविंदपुर जलापूर्ति योजना पूरी हो चुकी है. कुछ क्षेत्र के लोगों को पीने का पानी सप्लाई होता है. जबकि बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना के जरिये 113 गांव 19 पंचायत और रेल क्षेत्र में बसे 33 बस्ती के 20 लाख 25 हजार के लगभग लोगों को सप्लाई पानी का इंतजार है.