रांची प्लेन क्रैश के बाद से झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठ रहे बड़े सवाल, आम जनता से लेकर विधायक तक उठा रहे सवाल..Burn patient के लिए नहीं है इलाज
Ranchi: चतरा में हुए एयर एंबुलेंस क्रैश के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. एक ओर जहां फ्लाइट सेफ्टी को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है. सवाल है कि आखिर मरीज को बार-बार बेहतर इलाज के लिए राज्य से बाहर क्यों ले जाना पड़ता है. झारखंड में ही इलाज क्यों संभव नहीं हो पाती?
चतरा में हुए प्लेन क्रैश में जले हुए एक मरीज को इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था. क्या झारखंड में किसी भी दुर्घटना या घटना में जले हुए लोगों के लिए कोई बेहतर सरकारी व्यवस्था नहीं है, कि मरीजों को कर्ज लेकर एयर एम्बुलेंस से दिल्ली या दूसरे राज्यों में ले जाना पड़ता है? ये सारे सवाल विधानसभा के बजट सत्र में विधायकों के जुबान पर भी दिखे.
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान, विपक्षी पार्टियों के साथ सत्ताधारी पार्टी के विधायक और मंत्रियों ने भी माना कि राज्य के सरकारी अस्पतालों, यहां तक कि मेडिकल कॉलेजों में भी, जले हुए मरीजों के इलाज के लिए बर्न वार्ड या बर्न यूनिट की कमी है. हालांकि, सूबे के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस बारे में सवालों का कोई जवाब नहीं दिया. विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स के बर्न वार्ड की हालत स्थिति को बेहद दयनीय बताया. उन्होंने कहा कि यहां के बर्न वार्ड से शायद ही कोई मरीज ठीक हुआ हो. रिम्स के बर्न वार्ड की हालत ऐसी है कि मरीजों को इंफेक्शन होने का खतरा रहता है. सरकार रिम्स-2 बनाना चाहती है, लेकिन उनका ध्यान मौजूदा सिस्टम के सुधार पर नहीं है.
उन्होंने कहा कि रिम्स के सर्जरी विभाग के तहत चलने वाले बर्न वार्ड में भर्ती मरीजों को हमेशा इंफेक्शन का खतरा बना रहता है. बेड से लेकर दवा के बॉक्स तक में जंग लगा हुआ है. कई पंखे और एसी तक खराब पड़े हुए हैं. मरीजों को दवा बाहर से खरीदनी पड़ती है. नवीन जायसवाल ने कहा कि इसी वजह से लोग कर्ज लेकर भी प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं.
वहीं हजारीबाग से भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे है. उसमें भी बर्न मरीजों के लिए सरकारी स्तर पर इलाज का कोई बढ़िया व्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को इस्तीफा दे देना चाहिए. झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि बर्न केस के मरीजों के बेहतर इलाज के लिए बर्न वार्ड जरूरी हैं. कुछ जिलों में बर्न वार्ड हैं, लेकिन वे हाई स्टैंडर्ड के नहीं हैं. उन्होंने आगे कहा कि राज्य में सबसे बड़ी प्रॉब्लम स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और फैकल्टी की कमी है.
निरसा से माले विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि राज्य के हर जिले और मेडिकल कॉलेज में हाई-स्टैंडर्ड बर्न यूनिट्स स्थापित करना होगा. सुविधाओं की कमी के कारण, यहां के लोग इलाज के लिए दिल्ली या साउथ की ओर जाते हैं. पेयजल और स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने भी माना कि मरीजों के ज्यादा लोड के कारण राज्य का स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है. उन्होंने कहा कि राज्य के चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत है.
शहरी विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भी माना कि राज्य में जले हुए स्थिति में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए व्यवस्था को अपग्रेड करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि 30% से ज्यादा जलने पर मरीज के बचने की उम्मीद कम हो जाती है, फिर भी राज्य के बर्न यूनिट्स को अपग्रेड करने की जरूरत है. झारखंड में बर्न वार्ड यूनिट की खराब हालत को लेकर न सिर्फ आम लोग बल्कि विधायक और मंत्री भी सवाल उठा रहे हैं. लेकिन, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी जवाब देने के बजाय यह कहते हुए सदन में चले गए कि हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं है.
झारखंड के सभी जिला अस्पतालों में अलग से बर्न वार्ड नहीं हैं, यहां तक कि राज्य के सबसे बड़े और देश के टॉप 10 अस्पतालों में से एक रांची सदर अस्पताल में भी बर्न वार्ड नहीं है. बर्न मरीज़ों को बेहतर इलाज देने को लेकर स्वास्थ्य विभाग कितना सीरियस है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदर अस्पताल परिसर में 20 बेड का अलग बर्न वार्ड बनाने का काम शुरू हुआ था, जब बिल्डिंग बन गई, तो बिल्डिंग में ब्लड बैंक खोल दिया गया.







