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राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड में सियासी हलचल तेज, छह नामांकन फॉर्म ने बढ़ाया सस्पेंस

 
राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड में सियासी हलचल तेज, छह नामांकन फॉर्म ने बढ़ाया सस्पेंस
Jharkhand News: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। चुनावी गणित और जादुई आंकड़े के बीच अब सियासी दलों ने अपने-अपने मोहरे चलने शुरू कर दिए हैं। उम्मीदवारों के चयन और नामांकन प्रक्रिया के बीच अचानक बढ़ी हलचल ने चुनाव को और रोचक बना दिया है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पर्यवेक्षक भूपेश बघेल ने रांची पहुंचकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की और दावा किया कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है। हालांकि इसके बावजूद चुनावी तस्वीर अभी साफ नहीं दिख रही है।

राजनीतिक चर्चाओं को सबसे ज्यादा हवा छह नामांकन पत्रों की खरीद ने दी है। अब तक जिन लोगों ने नामांकन फॉर्म लिया है, उनमें प्रणव झा, बैद्यनाथ राम, भाजपा नेता गौरव वल्लभ, पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी, पूर्व वाईएसआर कांग्रेस नेता वी. विजयसाई रेड्डी और रवि कुमार यादव उर्फ रवि पीटर शामिल हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे परिमल नथवानी और वी. विजयसाई रेड्डी को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन नेताओं को किस राजनीतिक समर्थन का भरोसा मिला है। राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार को नामांकन के लिए 10 प्रस्तावकों की जरूरत होती है, ऐसे में सभी की निगाहें अब 8 जून पर टिकी हैं, जब नामांकन दाखिल होंगे और समर्थकों के नाम सामने आएंगे।

आंध्र प्रदेश की राजनीति के चर्चित चेहरे रहे वी. विजयसाई रेड्डी का नाम भी इस चुनाव में चर्चा का विषय बना हुआ है। सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा के बाद उनका झारखंड से नामांकन फॉर्म खरीदना कई सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इसे किसी बड़े रणनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं।

वहीं, दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके परिमल नथवानी की संभावित दावेदारी को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार नथवानी तभी चुनावी मैदान में उतरेंगे जब जीत के समीकरण पूरी तरह उनके पक्ष में होंगे। भाजपा की ओर से अब तक उम्मीदवार घोषित नहीं किए जाने से भी अटकलों का दौर तेज हो गया है।

नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ ही झारखंड का राज्यसभा चुनाव अब केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक रणनीति, गठबंधन समीकरण और पर्दे के पीछे चल रही गतिविधियों का बड़ा परीक्षण बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में नामांकन और समर्थन के खुलासे कई राजनीतिक रहस्यों से पर्दा उठा सकते हैं।