झारखंड के डीजीपी की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन-बाबूलाल मरांडी...
Ranchi: उन्होंने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ फैसले की अनदेखी करते हुए वरीयता क्रम तोड़कर सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले कनिष्ठ अधिकारी को डीजीपी बना दिया...
Jan 16, 2026, 21:41 IST
Ranchi: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की हालिया डीजीपी नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का खुला उल्लंघन बताते हुए कड़ी आलोचना की है.
उन्होंने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ फैसले की अनदेखी करते हुए वरीयता क्रम तोड़कर सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले कनिष्ठ अधिकारी को डीजीपी बना दिया.
बाबूलाल मरांडी ने गृह विभाग के उस तर्क को भ्रामक करार दिया, जिसमें कहा गया कि कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर होने से उपलब्ध नहीं हैं.
उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड कैडर के तीन सबसे वरिष्ठ डीजी रैंक अधिकारी हैं, अनिल पालटा, प्रशांत सिंह और एमएस भाटिया, जो किसी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं हैं. इनकी सेवा अवधि क्रमशः एक, दो और तीन वर्ष शेष है, फिर भी इनसे जूनियर को प्राथमिकता दी गई.
यह नियुक्ति न केवल यूपीएससी पैनल से चयन की प्रक्रिया का उल्लंघन है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा स्वयं बनाई गई डीजीपी नियुक्ति नियमावली के वरीयता क्रम का भी पालन नहीं किया गया. मरांडी ने चेतावनी दी कि ऐसी पक्षपातपूर्ण नियुक्ति पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार, ट्रांसफर-पोस्टिंग में लेनदेन, वसूली-रंगदारी और फर्जी मुकदमों को बढ़ावा देगी.
उन्होंने पूर्व डीजी अनुराग गुप्ता के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ने उनकी नियुक्ति के लिए कायदे-कानून ताक पर रख दिए थे. एसीबी और सीआईडी का प्रभार देकर अपने खिलाफ भ्रष्टाचार जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई लेकिन अंततः रातोंरात उन्हें हटाना पड़ा. मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की कि संवैधानिक प्रावधानों और कोर्ट निर्देशों का सम्मान करें और इस पक्षपात की समीक्षा कर गलती सुधारें.







