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आलमगीर आलम के जेल से बाहर आने पर बाबूलाल मरांडी का तीखा तंज, बोले- ऐसा जश्न मनाया जा रहा है मानो कोई क्रांतिकारी लौट आया हो

Ranchi: आलमगीर आलम की जेल से रिहाई पर कांग्रेस के जश्न ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है. बाबूलाल मरांडी के तीखे बयान से साफ है कि झारखंड की राजनीति में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने वाला है.
 
JHARKHAND

Ranchi: झारखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता आलमगीर आलम के जेल से बाहर आने के बाद सियासत तेज हो गई है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आलमगीर आलम की रिहाई पर जिस तरह से कांग्रेस नेताओं और समर्थकों द्वारा जश्न मनाया जा रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा,

“ऐसे जश्न मनाया जा रहा है मानो कोई क्रांतिकारी जेल से बाहर लौटा हो।”

झारखंड : जेल में बंद मंत्री आलमगीर आलम ने राज्य मंत्रिमंडल से दिया इस्तीफा  | Jharkhand: Jailed minister Alamgir Alam resigns from state cabinet

आलमगीर आलम पर बोले बाबूलाल मरांडी

सोशल मीडिया पर उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा है कि आलमगीर आलम को बेल यह केवल उम्र और बीमारी के आधार पर कड़ी शर्तों के साथ मिली अंतरिम राहत है. ये अंतिम फैसला नहीं. उन्होंने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग और टेंडर कमीशन घोटाले मामले में जेल में बंद पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार से जमानत पर बाहर आने का मौका मिला लेकिन इसे बाइज्जत बरी होना समझने की भूल कोई न करें.

babulal marandi bjp congress g ram ji yojana mgnrega name change jharkhand  जिस योजना पर हंगामा, वह गांधी के नाम पर थी ही नहीं.. कांग्रेस पर बरसे बाबूलाल  मरांडी, Jharkhand Hindi News -

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि उनके समर्थक और लाभार्थी जमानत पर ऐसे जश्न मना रहे हैं मानो कोई क्रांतिकारी आजादी की लड़ाई लड़कर लौटा हो. मिठाइयां बांटी जा रही हैं, पटाखे फोड़े जा रहे हैं, आतिशबाजी की जा रही है. क्या करोड़ों रुपये की कथित काली कमाई, कमीशनखोरी और गरीबों के हिस्से पर डाका डालने के आरोप अब उत्सव मनाने लायक उपलब्धि बन चुके हैं?

जमानत मिल जाना निर्दोष होने का प्रमाण नहीं: बाबूलाल मरांडी

बीजेपी नेता ने कहा कि जिस मामले में मंत्री के निजी सचिव के घरेलू सहायक के घर से करीब 32.20 करोड़ नकद बरामद हुए हो, वहां जनता सवाल पूछेगी ही. उन्होंने कहा कि आखिर एक घरेलू सहायक के घर में नोटों का पहाड़ कैसे खड़ा हो गया? नोट गिनने के लिए मशीनें मंगानी पड़ी थी. पूरा देश टीवी पर वह दृश्य देख रहा था.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि याद रखिए, जमानत मिल जाना निर्दोष होने का प्रमाण नहीं होता, मुकदमा अभी बाकी है. अदालतें अभी बाकी हैं और कानून की प्रक्रिया अभी लंबी चलेगी. सत्ता, संपर्क और संसाधनों के दम पर कुछ समय की राहत तो मिल सकती है लेकिन ऐसे मामलों का दाग आसानी से नहीं मिटता.

अगर भरोसा न हो तो लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक और कानूनी सफर को देख लीजिए. सत्ता गई, उम्र ढली, स्वास्थ्य बिगड़ा लेकिन पुराने मामलों की परछाई आज भी पीछा नहीं छोड़ रही है. भ्रष्टाचार के मामलों में अदालत की दस्तक देर से जरूर आती है लेकिन आती जरूर है.