नगर निगम चुनाव से पहले जानिए परेशानी से जूझते इन इलाकों की कहानी...
Ranchi: नगर निगम चुनाव से पहले अब सवाल यह है कि क्या ये जन समस्याएं चुनावी मुद्दा बनेंगी और क्या आने वाले जनप्रतिनिधि इनका स्थायी समाधान निकाल पाएंगे, या...
Jan 30, 2026, 20:30 IST
Ranchi: नगर निगम चुनाव का बिगुल बजते ही शहर में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. हर ओर विकास, सुविधा और सुशासन के वादे सुनाई दे रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खाती.
शहर के अलग-अलग इलाकों में आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. शहर के कांके क्षेत्र के वार्ड नंबर 1, 2 और 3 में पड़ताल की, जहां नाली, पेयजल और सरकारी योजनाओं से जुड़ी गंभीर जन समस्याएं सामने आईं. ये समस्याएं केवल इन वार्डों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे शहर की नगर व्यवस्था की तस्वीर पेश करती हैं.
कांके क्षेत्र के टिकली टोली, वार्ड नंबर 1 में नाली की समस्या वर्षों से बनी हुई है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह परेशानी नई नहीं है, बल्कि पिछले करीब 20 वर्षों से मोहल्लेवासी इसी हालात में रहने को मजबूर हैं.
मोहल्ला बसने के बाद से अब तक यहां व्यवस्थित नाली का निर्माण नहीं हुआ. घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों और गलियों में बहता तो है ही बल्की लोगों को घरों में उपयोग पानी स्टोरेज भी करना पड़ जाता है. जिससे पूरे इलाके में गंदगी और दुर्गंध फैली रहती है.
बारिश के दिनों में हालात और बदतर हो जाते हैं. कई घरों में पानी घुस जाता है और लोग मजबूरी में अपने घरों के भीतर ही पानी जमा होने देते हैं. इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकला.
आवारा कुत्तों के कारण भी लोग परेशान है शिकायत के बावजूद भी इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है.
वार्ड नंबर 2 के मिसिर गोंदा लोहरा कोचा में पेयजल की भारी किल्लत है.
इलाके में पाइपलाइन तो मौजूद है, लेकिन उससे न तो नियमित रूप से पानी आता है और न ही वह पीने योग्य होता है. कभी-कभार जो पानी सप्लाई होता है, वह गंदा होता है, जिससे लोग उसका इस्तेमाल करने से बचते हैं. यहां के निवासी आज भी कुछ गिने-चुने कुओं के सहारे अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं.
गर्मी के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है, जब कुएं भी सूखने लगते हैं. इसके बावजूद नगर निगम की ओर से पानी टैंकर की व्यवस्था नहीं की जाती. महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी लाने के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ता है.
वार्ड नंबर 3 के सिंधवार टोली में भी हालात बेहतर नहीं हैं. यहां पानी की समस्या के साथ-साथ सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठ रहे हैं. कुछ इलाकों में आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन नियमित रूप से नहीं हो रहा है, जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला पोषण प्रभावित हो रहा है.
इसके अलावा कई पात्र लाभुकों को अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है. लोगों का कहना है कि उन्होंने आवेदन किया, दस्तावेज जमा किए, लेकिन वर्षों बाद भी उन्हें आवास का लाभ नहीं मिला.
कार्यालयों के चक्कर काट-काटकर लोग थक चुके हैं. अबू आवास और प्रधानमंत्री आवास का लाभ भी लोगों को नहीं मिल पा रहा है शहर के अंदर खपड़े और कच्चे मकान में रहने को मजबूर है जहां दुर्घटना का भय सताता रहता है.
वार्ड 1, 2 और 3 की ये समस्याएं पूरे शहर की नगर व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं. नाली, पानी और सरकारी योजनाएं किसी एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि शहरभर में फैली बुनियादी चुनौतियां हैं.
नगर निगम चुनाव से पहले अब सवाल यह है कि क्या ये जन समस्याएं चुनावी मुद्दा बनेंगी और क्या आने वाले जनप्रतिनिधि इनका स्थायी समाधान निकाल पाएंगे, या फिर चुनाव बीतते ही ये मुद्दे एक बार फिर फाइलों और आश्वासनों में दबकर रह जाएंगे.







