बिजली संकट का बड़ा अलर्ट! 500 MW यूनिट बंद, झारखंड समेत कई राज्यों की सप्लाई प्रभावित
Jharkhand: डीवीसी के बोकारो थर्मल पावर प्लांट की 500 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट शुक्रवार को तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई। यूनिट में बायलर ट्यूब लीकेज की समस्या सामने आने के बाद दोपहर करीब 2 बजे इसे शटडाउन कर दिया गया। इसके चलते अगले दो दिनों तक बिजली उत्पादन प्रभावित रहने की संभावना है। वहीं, यूनिट के बंद रहने से झारखंड के अलावा दिल्ली, पंजाब और बिहार समेत अन्य क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति पर भी दबाव पड़ सकता है।

364 MW से घटकर 300 MW हुआ उत्पादन
प्लांट से मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह 500 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट से करीब 364 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था। दोपहर करीब पौने दो बजे उत्पादन घटकर 300 मेगावाट रह गया। उत्पादन में लगातार गिरावट को देखते हुए तकनीकी टीम ने यूनिट की जांच की।
जांच के दौरान बायलर की ट्यूब में लीकेज की पुष्टि हुई। इसके बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यूनिट को तत्काल शटडाउन कर दिया गया।
बायलर ठंडा होने के बाद शुरू होगी मरम्मत
मुख्य प्रबंधक सह परियोजना प्रधान सुशील कुमार अरजरिया ने बताया कि शटडाउन के बाद बायलर को पूरी तरह ठंडा होने में समय लगेगा। बायलर के सुरक्षित तापमान पर आने के बाद ही मेंटेनेंस टीम लीकेज वाले हिस्से की मरम्मत शुरू कर सकेगी।
उन्होंने बताया कि यदि मरम्मत कार्य निर्धारित समय में पूरा हो जाता है और परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो सोमवार शाम तक यूनिट को लाइटअप कर दोबारा बिजली उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
कई राज्यों की बिजली आपूर्ति पर पड़ सकता है असर
डीवीसी का बोकारो थर्मल पावर प्लांट क्षेत्र के प्रमुख बिजली उत्पादक संयंत्रों में शामिल है। यहां से उत्पादित बिजली राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से झारखंड के साथ-साथ दिल्ली, पंजाब, बिहार और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचती है।
ऐसे में 500 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट के बंद रहने से बिजली उत्पादन में कमी आएगी। इसका असर संबंधित क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति और पावर सप्लाई व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।
क्या होता है बायलर ट्यूब लीकेज?
पावर प्लांट के बायलर में बड़ी संख्या में धातु की ट्यूब लगी होती हैं। इन ट्यूबों के भीतर पानी प्रवाहित होता है, जिसे अत्यधिक तापमान पर गर्म करके भाप में बदला जाता है। यही भाप टर्बाइन को घुमाती है और बिजली का उत्पादन होता है।
लगातार उच्च तापमान और दबाव, जंग या अन्य तकनीकी कारणों से इन ट्यूबों में दरार या छेद हो सकता है। इससे पानी या भाप का रिसाव शुरू हो जाता है, जिसे ट्यूब लीकेज कहा जाता है।
ट्यूब लीकेज की स्थिति में बायलर और अन्य उपकरणों को गंभीर नुकसान से बचाने के लिए यूनिट को बंद करना जरूरी होता है। इसके बाद बायलर को ठंडा किया जाता है और लीकेज वाले हिस्से की पहचान कर उसकी मरम्मत की जाती है।
सोमवार तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य
फिलहाल यूनिट को सुरक्षित तरीके से बंद कर दिया गया है और मरम्मत की तैयारी की जा रही है। बायलर के ठंडा होने के बाद तकनीकी टीम लीकेज वाले हिस्से की मरम्मत करेगी। प्रबंधन की कोशिश है कि काम समय पर पूरा कर सोमवार शाम तक यूनिट को दोबारा लाइटअप कर बिजली उत्पादन बहाल कर दिया जाए।







