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धनबाद-जामताड़ा के बीच बड़ा संकट! बेजरा पुल का पिलर धंसा, प्रशासन ने बंद कराया रास्ता

Dhanbad: धनबाद और जामताड़ा को जोड़ने वाले बेजरा पुल का पिलर नंबर-4 धंस गया, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद करा दिया है. अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. ग्रामीणों ने पुल के आसपास लंबे समय से हो रहे कथित बालू उठाव और भारी वाहनों की आवाजाही को पिलर की कमजोरी की वजह बताया है.
 
JHARKHAND

Dhanbad: धनबाद और जामताड़ा जिले को जोड़ने वाले बेजरा पुल का एक पिलर धंस गया है। पुल के पिलर नंबर चार के धंसने की सूचना मिलते ही प्रशासन ने एहतियातन इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद करा दिया। पुल की स्थिति खराब होने के कारण दोनों जिलों के बीच सीधा संपर्क प्रभावित हुआ है।

Dhanbad Bejra Bridge pillar sunk

प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर लोगों से बेजरा पुल का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है। धनबाद से जामताड़ा की ओर जाने वाले लोगों को फिलहाल कासजोड़ और करमदाहा होकर वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है।

बालू उठाव को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

पुल के पिलर के धंसने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने इसके पीछे लंबे समय से चल रहे बालू उठाव को संभावित वजह बताया है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी से लगातार बालू निकाले जाने और बालू लदे भारी वाहनों की आवाजाही के कारण पुल की नींव कमजोर हुई।

लोगों का कहना है कि यदि पुल के आसपास लंबे समय से बालू का परिवहन जारी था, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। हालांकि, पुल के पिलर धंसने की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

Dhanbad Bejra Bridge pillar sunk

मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी

पिलर धंसने की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पुल की स्थिति का जायजा लिया। पूर्वी टुंडी के अंचलाधिकारी सुरेश प्रसाद बर्नवाल और जामताड़ा के अंचलाधिकारी अभिश्वर मुर्मू ने मौके पर निरीक्षण किया। इसके अलावा धनबाद के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर भी घटनास्थल पर पहुंचे और पुल की मौजूदा स्थिति का आकलन किया।

अधिकारियों ने पुल की सुरक्षा को लेकर तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

जुगुड़ी घाट से बालू उठाव का आरोप

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जुगुड़ी घाट से नाव के जरिए लगातार बालू निकाले जाने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल के आसपास बड़े पैमाने पर बालू हटाए जाने से नदी की प्राकृतिक सतह प्रभावित हुई, जिसका असर पुल के पिलर और उसकी नींव पर पड़ सकता है।

इसके साथ ही बालू लदे ट्रैक्टर और हाईवा के लगातार गुजरने से पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।

पहले भी बैरिकेडिंग कर रोका गया था आवागमन

प्रशासन के अनुसार, बेजरा पुल पहले से ही काफी क्षतिग्रस्त स्थिति में था। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जेसीबी की मदद से रास्ते को तत्काल ब्लॉक कर दिया गया है, ताकि कोई वाहन पुल पर न पहुंच सके और संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।

प्रशासन का कहना है कि पिछले वर्ष भी पुल पर बैरिकेडिंग कर आवागमन रोकने का प्रयास किया गया था। हालांकि, रात के समय असामाजिक तत्वों द्वारा बैरिकेडिंग हटाए जाने की बात सामने आई थी।

बालू के कथित अवैध परिवहन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान भी संबंधित लोगों के मौके से भाग जाने की जानकारी अधिकारियों की ओर से दी गई है।

एनजीटी की पाबंदी के बावजूद बालू उठाव का आरोप

क्षेत्र में एनजीटी की पाबंदी के बावजूद कथित तौर पर बालू उठाव और परिवहन जारी रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने खनन विभाग, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई की जाती तो पुल की स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता था।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुल के पिलर के धंसने की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगी।

तकनीकी जांच की तैयारी

पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से तकनीकी जांच कराने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी। इसके साथ ही पुल के आसपास बालू उठाव और भारी वाहनों की आवाजाही पर सख्ती बरतने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल प्रशासन ने लोगों से पुल से दूर रहने और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की है। अब सबकी नजर तकनीकी जांच की रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि पुल की मरम्मत संभव है या इसके लिए कोई बड़ा निर्माण कार्य करना पड़ेगा।

बेजरा पुल की घटना ने एक बार फिर अवैध बालू खनन, भारी वाहनों की आवाजाही और महत्वपूर्ण पुलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।