NEET को लेकर बड़ा फैसला, परीक्षार्थियों को अतिरिक्त समय देने का ऐलान, अगले साल से ऑनलाइन एग्जाम की तैयारी
Jharkhand: NEET-UG परीक्षा रद्द होने के बाद केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है. री-एग्जाम की तारीख घोषित करते हुए बताया गया है कि NEET UG का दोबारा आयोजन 21 जून को किया जाएगा. वहीं, अगले साल से परीक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए इसे ऑनलाइन यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया गया है.
शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इसकी विस्तृत जानकारी दी. शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार को NEET परीक्षा रद्द करने का कठिन फैसला लेना पड़ा. पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच CBI को सौंपी गई है. सरकार ने साफ किया है कि परीक्षा माफिया के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाएगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मंत्री ने चेतावनी दी कि परीक्षा में गड़बड़ी की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी.
ऑनलाइन होगी परीक्षा, छात्रों को मिलेगी नई सुविधाएं
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, अगले साल से NEET UG परीक्षा OMR शीट की जगह ऑनलाइन आयोजित की जाएगी ताकि नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। वहीं, इस साल होने वाले री-एग्जाम में छात्रों को 15 मिनट अतिरिक्त समय दिया जाएगा. परीक्षा दोपहर 2 बजे से शुरू होकर शाम 5:15 बजे तक चलेगी. छात्रों को परीक्षा शहर चुनने का विकल्प मिलेगा और इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। नए एडमिट कार्ड 14 जून तक जारी किए जाएंगे.
फीस होगी माफ, छात्रों के हित में लिया फैसला
शिक्षा मंत्री ने कहा कि परीक्षा रद्द होने के दिन ही NTA ने छात्रों की फीस लौटाने की जानकारी दे दी थी. अब दोबारा होने वाली परीक्षा के लिए छात्रों से कोई फीस नहीं ली जाएगी. सरकार का कहना है कि विद्यार्थियों पर किसी तरह का आर्थिक बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा. मंत्रालय ने यह भी कहा कि NEET पेपर लीक एक सामाजिक चुनौती बन गया है और इससे जुड़े नेटवर्क की हर एंगल से जांच की जा रही है.
3 मई को हुई थी परीक्षा, पेपर लीक के बाद बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि NEET UG परीक्षा 3 मई को देशभर में आयोजित की गई थी. इसके बाद पेपर लीक और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद मामले की जांच CBI को सौंप दी गई. जांच एजेंसियों के मुताबिक, पेपर लीक की शुरुआत कथित तौर पर नासिक से हुई और राजस्थान, उत्तराखंड, केरल समेत कई राज्यों तक कथित ‘गेस पेपर’ पहुंचा. मामले की जांच अभी जारी है.







