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झारखंड की महिला किसानों को बड़ी सौगात! समेकित खेती से बढ़ेगी कमाई, जानें क्या है पूरा प्लान

Ranchi: झारखंड की महिला किसानों की आय बढ़ाने के लिए समेकित खेती को बढ़ावा देने की तैयारी है. इस मॉडल में खेती के साथ पशुपालन, बागवानी, मछली पालन और अन्य कृषि गतिविधियों को जोड़ा जाएगा. इसका उद्देश्य किसानों को एक ही स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय आय के कई विकल्प उपलब्ध कराना है.
 
JHARKHAND

Ranchi: झारखंड की महिला किसानों के लिए राज्य सरकार जल्द ही एक खास योजना शुरू करने की तैयारी में है। ‘महिला किसान खुशहाली योजना’ के नाम से प्रस्तावित इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिला किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें खेती के साथ अन्य कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

झारखंड की महिला किसानों को जल्द मिलेगी बड़ी सौगात, समेकित खेती से बढ़ेगी आय

योजना को लेकर गुरुवार को नेपाल हाउस स्थित मंत्रालय के सभागार में उच्चस्तरीय बैठक हुई। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभाग के सचिव अबु बकर सिदिक, विशेष सचिव, विभिन्न निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

समेकित खेती होगी योजना का मुख्य आधार

बैठक में योजना के स्वरूप, लाभार्थियों के चयन, समेकित खेती के मॉडल, सरकारी सहायता और लाभुक अंशदान समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। योजना को अंतिम रूप देने के बाद इसे मंत्रिपरिषद के समक्ष स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करने की तैयारी है।

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि महिला किसान खुशहाली योजना राज्य की महिला किसानों के लिए फ्लैगशिप योजना बनने जा रही है। योजना तैयार करने से पहले विभिन्न संस्थाओं, कृषि विशेषज्ञों और महिला किसानों के साथ चर्चा कर उनके सुझाव और अनुभव भी लिए गए हैं।

Jharkhand agri minster Shilpi Neha Tirkey assures swift relief for rain  damages to crops - The Theorist

इन्हीं सुझावों को ध्यान में रखते हुए योजना में समेकित खेती (Integrated Farming System) को केंद्र में रखा जा रहा है।

खेती के साथ पशुपालन और मछली पालन भी

योजना का उद्देश्य महिला किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आय के कई स्रोतों से जोड़ना है। इसके तहत खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी जैसी गतिविधियों को एक साथ बढ़ावा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य में समेकित खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। महिला किसानों को इस अभियान से जोड़ना योजना की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

एक एकड़ जमीन पर तैयार होगा IFS मॉडल

‘महिला किसान खुशहाली योजना’ के तहत फिलहाल एक एकड़ भूमि को आधार बनाकर समेकित कृषि प्रणाली का मॉडल विकसित करने की योजना है। स्थानीय परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार एक मॉडल में अलग-अलग गतिविधियों को शामिल किया जा सकेगा।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • बकरी पालन
  • सूअर पालन
  • बत्तख पालन
  • गाय पालन
  • मछली पालन
  • बागवानी और हॉर्टिकल्चर
  • कृषि आधारित अन्य गतिविधियां

इस मॉडल में आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। कोशिश होगी कि एक एकड़ भूमि से महिला किसान को सालभर आय के कई स्रोत मिल सकें।

तीन से चार तरह के मॉडल किए जा रहे तैयार

कृषि विभाग फिलहाल तीन से चार अलग-अलग IFS मॉडल तैयार करने में जुटा है। इन मॉडलों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद यह तय किया जाएगा कि प्रत्येक मॉडल के लिए सरकार की ओर से कितनी आर्थिक सहायता दी जाएगी और लाभुक महिला किसान को कितना अंशदान करना होगा।

मंत्री के अनुसार योजना में महिला किसानों की भागीदारी और अपने खेत पर स्वामित्व की भावना को मजबूत करने के लिए लाभुक का सीमित अंशदान रखने का प्रस्ताव है। योजना के सफल संचालन की स्थिति में इस अंशदान को वापस करने के प्रावधान पर भी विचार किया जा रहा है।

पहले चरण में व्यक्तिगत महिला किसानों को मिलेगा लाभ

योजना के पहले चरण में व्यक्तिगत महिला किसानों को लाभ देने का प्रस्ताव है। फिलहाल एक लाभुक के लिए एक एकड़ भूमि की आवश्यकता रखे जाने की बात कही गई है।

सरकार का लक्ष्य है कि महिला किसान केवल खेती करने वाली न रहें, बल्कि अपने खेत को एक पूरी आर्थिक इकाई के रूप में संचालित करें। एक ही भूमि पर खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी को जोड़कर आय के अलग-अलग साधन विकसित किए जाएंगे।

जल्द कैबिनेट के सामने रखा जाएगा प्रस्ताव

कृषि विभाग योजना के तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को अंतिम रूप देने में जुटा है। अलग-अलग IFS मॉडल, सरकारी सहायता और लाभुक अंशदान से जुड़े प्रावधान तय होने के बाद योजना को मंत्रिपरिषद के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

सरकार की मंजूरी मिलने के बाद योजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी। माना जा रहा है कि इससे झारखंड की महिला किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा अतिरिक्त आय के नए अवसर मिल सकते हैं।