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JPSC भर्ती घोटाले में बड़ा सवाल, 60 आरोपियों पर गंभीर आरोप, CBI रिपोर्ट के बावजूद सुनवाई लंबित

Ranchi: हाल ही में सीआईडी ने गड़बड़ी के आरोप में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को गिरफ्तार किया है. आयोग कार्यालय में छापेमारी के बाद तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद सीआईडी ने उनके आवास पर भी छापेमारी की. आरोप है कि 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में भी अनियमितताएं हुईं और अयोग्य अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया.
 
JHARKHAND

Ranchi: झारखंड की द्वितीय JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले में जांच आगे बढ़ने के बावजूद न्यायिक प्रक्रिया अब भी अधर में है. CBI द्वारा चार्जशीट दाखिल किए हुए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन मामले में अब तक नियमित ट्रायल शुरू नहीं हो सका है. इस देरी को लेकर अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है. हाल ही में सीआईडी ने गड़बड़ी के आरोप में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को गिरफ्तार किया है. आयोग कार्यालय में छापेमारी के बाद तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद सीआईडी ने उनके आवास पर भी छापेमारी की. आरोप है कि 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में भी अनियमितताएं हुईं और अयोग्य अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया.

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इसी बीच द्वितीय जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी सीबीआई जांच रिपोर्ट फिर चर्चा में है. सीबीआई ने इस मामले में जांच पूरी कर करीब दो वर्ष पहले अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंप दी थी, लेकिन अब तक मामले में ट्रायल शुरू नहीं हो सका है. इस वजह से करीब 20 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे मेधावी अभ्यर्थियों में निराशा बनी हुई है. बता दें, प्रभात खबर ने पूर्व में हुई गड़बड़ियों की तहकीकात की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसमें सीबीआइ ने 60 लोगों को आरोपी बनाया है. सबकी कारस्तानी और सुबूत कोर्ट को दिए हैं. पहली बार एक साथ सभी आरोपियों के नाम और उनके विरुद्ध मिले साक्ष्य एकत्रित किया.

CBI की जांच में इस मामले में करीब 60 लोगों को आरोपी बनाया गया है. आरोपियों में तत्कालीन JPSC से जुड़े अधिकारी, सरकारी पदाधिकारी, बिचौलिये और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं. जांच एजेंसी ने परीक्षा में अनियमितता, पद के दुरुपयोग, साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं.

अब तक ट्रायल क्यों नहीं शुरू हुआ?

सूत्रों के अनुसार, आरोप तय (Charge Framing) होने की प्रक्रिया पूरी नहीं होने और विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं के कारण मुकदमे की सुनवाई नियमित रूप से शुरू नहीं हो सकी है. इस वजह से वर्षों से मामले का अंतिम निपटारा लंबित है.

अभ्यर्थियों में बढ़ रही नाराजगी

JPSC परीक्षा में शामिल रहे कई अभ्यर्थियों का कहना है कि मामले में देरी से न्याय प्रभावित हो रहा है. उनका कहना है कि यदि समय पर ट्रायल शुरू होता, तो दोषियों की जवाबदेही तय होती और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवादों का समाधान भी तेजी से हो सकता था.

CBI ने लगाए हैं गंभीर आरोप

CBI की चार्जशीट में परीक्षा प्रक्रिया में कथित धांधली, चयन प्रक्रिया में अनियमितता, प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है. हालांकि, मामले में अंतिम फैसला अदालत के ट्रायल और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा.

मामले को लेकर अब एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि चार्जशीट दाखिल होने के दो साल बाद भी ट्रायल शुरू नहीं होना न्यायिक प्रक्रिया में देरी का संकेत है, जबकि हजारों अभ्यर्थी वर्षों से इस मामले के निष्पक्ष निपटारे का इंतजार कर रहे हैं.