JPSC भर्ती में बड़ा खुलासा! OMR शीट में सिर्फ 19 गोले भरे, फिर भी मिले 88 अंक, चयन पर उठे गंभीर सवाल
JPSC Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में आ गई है. आरोप है कि एक अभ्यर्थी ने OMR शीट में केवल 19 उत्तर भरे, लेकिन मूल्यांकन के बाद उसे 88 अंक दे दिए गए और उसका चयन भी हो गया. इस मामले के सामने आने के बाद आयोग की मूल्यांकन प्रक्रिया और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

मामले को लेकर अभ्यर्थियों और विपक्षी दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल होगा. वहीं, JPSC की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है. यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई और चयन प्रक्रिया की समीक्षा की जा सकती है.
सीबीआइ ने दूसरी सिविल सेवा परीक्षा की कॉपियों की जांच कर जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें साफ है कि किस प्रकार ओएमआर शीट में गड़बड़ी की गयी. सीबीआइ ने बताया है कि शीट में जिन लोगों ने कम गोले भरे, उन्हें भी भरपूर अंक दिया गया. गोपला सिंह जो जेपीएससी के तत्कालीन सदस्य थे, उनके बेटे कुंदन कुमार सिंह ने ओएमआर में सिर्फ 19 गोले भरे थे, लेकिन रिजल्ट में उन्हें 88 अंक दे दिये गये. अंत में वह चयनित भी हुए. ऐसा ही कई कॉपियों में पाया गया. ऐसे में यह तय है कि जिन्हें नौकरी मिल गयी है, वह भी अब बचेगी या नहीं यह सवालों के घेरे में है.
सीआइडी की जांच के बाद अब अधिकांश भर्तियां सीबीआइ या सीआइडी की जांच की जद में आ गयी हैं. जेपीएससी चेयरमैन इस्तीफा दे चुके हैं पर जांच चल रही है, परीक्षा नियंत्रक को गड़बड़ी के आरोप में जेल भेजा जा चुका है. जेपीएससी दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा विवाद की जांच अब भी चल रही है. सीबीआइ ने जांच कर एक रिपोर्ट सौंपी है, दूसरी आनी बाकी है. रिपोर्ट में स्पष्ट गड़बड़ियां सामने आयी हैं. पर जांच अभी चल रही है, इसलिए चयनित बीडीओ, सीओ, डीएसपी, कमांडेट, वाणिज्यकर अधिकारी जैसे पदों पर आराम से काम कर रहे हैं.
अब जांच में गड़बड़ियां उजागर हो रही हैं. एक तथ्य यह भी है कि सीबीआइ ने नेताओं से जुड़े अभ्यर्थियों के नाम तो उजागर किये, जेपीएससी में कार्यरत लोगों के रिश्तेदारों को भी ढूंढ़ लिया, लेकिन किन बड़े अफसरों की पैरवी पर किन लोगों की नियुक्तियां हुई, इसकी कभी जांच ही नहीं हुई.
सीबीआइ ने जांच कर बताया है कि प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में स्पष्ट अनियमितताएं मिली हैं. परीक्षा की कॉपियों में जो गड़बड़ी की वह अपनी जगह हैं, सबसे बड़ी बात नियमों का उल्लंघन कर तय संख्या से अधिक संख्या में उम्मीदवारों को सफल घोषित कर दिया गया. जेपीएससी की दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2004) में 172 पदों के लिए परीक्षा हुई. प्रारंभिक परीक्षा में नियमानुसार 1,720 अभ्यर्थी सफल होने चाहिए थे, लेकिन आयोग ने 16,314 को सफल घोषित कर दिया. मुख्य परीक्षा में भी नियमानुसार अधिकतम 516 सफल होने चाहिए थे, पर 804 घोषित किये गये.
ओएमआर में किसने कितने गोले भरे, कितना अंक मिला
कुंदन कुमार सिंह : गोपाल सिंह के बेटे, ओएमआर में सिर्फ 19 गोले भरे थे पर उन्हें 88 अंक दिये गये.
मौसमी नागेश : नागेश की बेटी, ओएमआर में 50 गोले भरे पर 69 अंक दर्ज, सामान्य अध्ययन में 55 अंक बढ़ाये गये.
कानू राम नाग : प्रकाश कुमार, संगीता कुमारी, रजनीश कुमार, शिवेंद्र, सभी ने ओएमआर में जितने गोले भरे, उससे काफी अधिक अंक उन्हें दे दिये गये.
एमजी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के प्रोफेसर/मूल्यांकनकर्ता ने Court में यह स्वीकार किया कि हां उन्होंने अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ाये थे. परमानंद सिंह व अरविंद कुमार सिंह के दबाव में उन्होंने ऐसा किया था.
ओएमआर स्कैनिंग मशीन में मेमोरी ही नहीं थी
जांच में यह पता चला कि ओएमआर स्कैनिंग मशीन में स्वयं की मेमोरी नहीं थी, इसलिए इसे किसी कंप्यूटर के साथ जोड़कर इसमें छेड़छाड़ करना आसान था. यही हुआ, साजिशकर्ताओं ने जेपीएससी के स्ट्रॉन्ग रूम में गुपचुप तरीके से मनचाहा काम किया. वहां एक निजी व्यक्ति अपने निजी कंप्यूटर का इस्तेमाल करता था. आरोप है कि उसने ही सारी गड़बड़ी की. जब वह हटा, तो वह अपना कंप्यूटर भी ले गया, जो अब तक सीबीआइ को नहीं मिला है.
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