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राष्ट्रपति के अपमान के विरोध में भाजपा का प्रदर्शन, सीएम ममता बनर्जी का फूंका पुतला

Ranchi: पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ममता बनर्जी का पुतला फूंकने के बाद भाजपा एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव ने कहा कि सत्ता के नशे में ममता बनर्जी को अब मर्यादा याद दिलानी पड़ रही है. पूर्व राज्यसभा सांसद ने कहा कि देश की प्रथम महिला जो जनजातीय समुदाय से आती हैं उनका अपमान जानबूझकर ममता बनर्जी ने किया है. समीर उरांव ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 07 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल के
 
JHARKHAND

Ranchi: झारखंड में भाजपा एसटी मोर्चा द्वारा प्रदेश भर के सभी जिलों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने ममता बनर्जी का पुतला दहन कर टीएमसी सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान को लेकर टीएमसी सरकार की आलोचना की. बड़ी संख्या में भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के कार्यकर्ता, रांची महानगर के कार्यकर्ता पूर्व राज्यसभा सांसद समीर उरांव के नेतृत्व में परमवीर अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन किया. इसके पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू,रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के व्यवहार पर आपत्ति जता चुके हैं.

राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप

पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ममता बनर्जी का पुतला फूंकने के बाद भाजपा एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव ने कहा कि सत्ता के नशे में ममता बनर्जी को अब मर्यादा याद दिलानी पड़ रही है. पूर्व राज्यसभा सांसद ने कहा कि देश की प्रथम महिला जो जनजातीय समुदाय से आती हैं उनका अपमान जानबूझकर ममता बनर्जी ने किया है. समीर उरांव ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 07 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग, सिलीगुड़ी वाले इलाके में आयोजित 09वें अंतर्राष्ट्रीय संताल सम्मेलन में भाग लेंगे गईं थीं, उस कार्यक्रम में विदेश से भी लोग आए हुए थे,वैसी स्थिति में न तो राष्ट्रपति के लिए मान्य प्रोटोकाल का पालन नहीं किया गया, बल्कि उनका कार्यक्रम स्थल बदल दिया गया.

हेमंत सोरेन और झामुमो की चुप्पी पर उठाए सवाल

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ऐसा कृत्य अक्षम्य है. समीर उरांव ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री द्वारा राष्ट्रपति के बंगाल दौरे के दौरान किए गए व्यवहार से भाजपा के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आदिवासी समुदाय के लोग मर्माहत हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि देश-दुनिया की छोटी-छोटी बातों पर प्रतिक्रिया देने वाले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी चुप है. समीर उरांव ने कहा कि आज अल्बर्ट एक्का चौक पर पुतला फूंका है, कल से यह कार्यक्रम प्रखंड और मंडल तक पहुंचेगा. हम देश की राष्ट्रपति का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते.

वहीं झारखंड भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष आरती कुजूर ने कहा कि एक महिला होकर भी ममता बनर्जी ने आदिवासी राष्ट्रपति का जानबूझकर अपमान किया है,उन्हें राष्ट्रपति से माफी मांगनी चाहिए. भाजपा नेत्री आरती कुजूर ने कहा कि राष्ट्रपति जहां भी जाती हैं, एक प्रोटोकॉल के तहत उनका सम्मान किया जाता है, लेकिन ममता बनर्जी लगातार उनका अपमान करती रही हैं. आरती कुजूर ने कहा कि राष्ट्रपति का विवेकाधिकार है कि वह कहां जाएं और कहां न जाएं.

BJP ST Morcha Protest in Ranchi

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा और सम्मान बनाए रखना सभी सरकारों और राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान प्रोटोकॉल से जुड़ी किसी प्रकार की चूक हुई है तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और तथ्यों के आधार पर उसकी निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए.

राकेश सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रपति किसी पार्टी विशेष नहीं, बल्कि पूरे देश की प्रतिनिधि होती हैं और उनका पद संविधान की सर्वोच्च गरिमा का प्रतीक है. इसलिए उनके किसी भी कार्यक्रम में आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन होना ही चाहिए. कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इस मुद्दे को लेकर अनावश्यक राजनीतिक टकराव और बयानबाजी से बचना चाहिए. संवैधानिक पदों से जुड़े मामलों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है. केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को इस विषय पर संयम और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह भी मानना है कि देश इस समय कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे में राजनीतिक दलों को आपसी आरोप-प्रत्यारोप के बजाय लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए. कांग्रेस पार्टी हमेशा से संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान की पक्षधर रही है. हम उम्मीद करते हैं कि इस मामले में सभी पक्ष मर्यादा और संवैधानिक परंपराओं का पालन करते हुए समाधान निकालेंगे, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा बनी रहे.