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मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द होने से छात्रों की मेहनत पर असर, आकांक्षा के छात्र निराश

Ranchi: विद्यार्थियों का कहना है कि एक बार परीक्षा के लिए पूरी ताकत, समय और मानसिक ऊर्जा लगा देने के बाद उसी तैयारी को फिर से दोहराना बेहद कठिन होता है. एक छात्र ने कहा कि क्या महाभारत का युद्ध दोबारा हो सकता है? ठीक उसी तरह परीक्षा की तैयारी भी होती है. हम पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देते हैं, लेकिन अनियमितताओं का खामियाजा सिर्फ छात्रों को भुगतना पड़ता है.
 
JHARKHAND

Ranchi: झारखंड में NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद हजारों परीक्षार्थियों के सामने फिर से तैयारी की चुनौती खड़ी हो गई है. पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार ने 12 मई 2026 को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया. मूल रूप से यह परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी, लेकिन अब दोबारा परीक्षा 21 जून को कराई जाएगी. इस फैसले ने छात्रों के मानसिक दबाव को कई गुना बढ़ा दिया है.

रांची स्थित झारखंड सरकार द्वारा संचालित आकांक्षा कोचिंग सेंटर के लगभग 25 विद्यार्थियों ने इस वर्ष NEET-UG परीक्षा दी थी. परीक्षा रद्द होने के बाद इन विद्यार्थियों में निराशा और मानसिक तनाव साफ दिखाई दे रहा है. कई छात्रों का कहना है कि महीनों की कठिन मेहनत और मानसिक तैयारी के बाद परीक्षा देना किसी युद्ध से कम नहीं होता. ऐसे में परीक्षा रद्द होना उनके आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति पर सीधा असर डाल रहा है.

विद्यार्थियों का कहना है कि एक बार परीक्षा के लिए पूरी ताकत, समय और मानसिक ऊर्जा लगा देने के बाद उसी तैयारी को फिर से दोहराना बेहद कठिन होता है. एक छात्र ने कहा कि क्या महाभारत का युद्ध दोबारा हो सकता है? ठीक उसी तरह परीक्षा की तैयारी भी होती है. हम पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देते हैं, लेकिन अनियमितताओं का खामियाजा सिर्फ छात्रों को भुगतना पड़ता है.

कुछ छात्रों के लिए मौका

हालांकि कुछ विद्यार्थियों का यह भी मानना है कि जिन छात्रों की परीक्षा खराब गई थी, उनके लिए यह दोबारा मौका किसी अवसर से कम नहीं है. लेकिन जिन छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया था और जिन्हें अच्छे अंक की उम्मीद थी, उनके लिए यह फैसला मानसिक रूप से काफी परेशान करने वाला है.विद्यार्थियों ने कहा कि परीक्षा की तैयारी के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है. बार-बार पढ़ाई की रणनीति बदलना, तनाव में रहना और भविष्य की अनिश्चितता उन्हें लगातार परेशान कर रही है.

इसके बावजूद अधिकांश छात्र दोबारा परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं. संस्थान में फिर से रिवीजन क्लास, टेस्ट सीरीज और विशेष काउंसलिंग सत्र शुरू किए गए हैं ताकि छात्र मानसिक रूप से मजबूत रह सकें. शिक्षकों का कहना है कि इस समय छात्रों को केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि भावनात्मक सहयोग की भी जरूरत है.

42 छात्रों ने पास किया था JEE Main

इधर आकांक्षा कोचिंग सेंटर प्रबंधन का कहना है कि संस्थान के विद्यार्थी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी सत्र में आकांक्षा योजना के 42 छात्रों ने JEE Main 2026 में सफलता हासिल कर संस्थान की उपलब्धियों को और मजबूत किया है. रांची जिला स्कूल कैंपस में संचालित राज्य स्तरीय आकांक्षा कार्यक्रम के इन छात्रों ने शानदार परसेंटाइल हासिल किए हैं.

JEE Main 2026 में शुभम कुमार बरनवाल ने 99.83 परसेंटाइल हासिल कर सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. वहीं कृष्णा कुमार ने 98.98, विनीत कुमार ने 96.83, सुन्नी कुमार यादव ने 96.63 और आकाश कुमार ने 96.14 परसेंटाइल प्राप्त किए. इसके अलावा कई अन्य छात्रों ने भी सफलता हासिल की है. इनमें सामान्य, ओबीसी, एससी और एसटी सभी वर्गों के छात्र शामिल हैं.

2016-17 में शुरू हुई थी आकांक्षा

आकांक्षा योजना की शुरुआत वर्ष 2016-17 में झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा की गई थी. योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराना है. छात्रों को यहां निशुल्क आवासीय सुविधा, भोजन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है.

2025 में आकांक्षा योजना की सबसे बड़ी सफलता

वर्ष 2025 आकांक्षा योजना के लिए यादगार और ऐतिहासिक साबित हुआ. इस साल मेडिकल और इंजीनियरिंग दोनों बैच के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी जगह बनाई.

Akansha students

कई विद्यार्थियों को आईआईटी दिल्ली, आईआईटी धनबाद (ISM), आईआईटी बेंगलुरु, बीआईटी सिंदरी और बीआईटी मेसरा जैसे नामचीन संस्थानों में प्रवेश मिला. मेडिकल क्षेत्र में छात्रों ने रिम्स रांची, राम मनोहर लोहिया मेडिकल कॉलेज भुवनेश्वर और जिपमर पुदुचेरी जैसे प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में सीट हासिल की. इसके अलावा कुछ प्रतिभाशाली छात्रों ने क्लैट परीक्षा उत्तीर्ण कर नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में दाखिला प्राप्त किया.

सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि योजना के कई छात्रों को 70 से 80 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरियां मिलीं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के इन बच्चों के लिए यह उपलब्धि सपने के साकार होने जैसी थी. इस वर्ष कुल 8 छात्रों का चयन विभिन्न आईआईटी संस्थानों में हुआ, जबकि रिम्स, एम्स और अन्य प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में दर्जनों छात्रों ने सफल प्रवेश पाया. बीआईटी सिंदरी जैसे इंजीनियरिंग कॉलेज में आकांक्षा के छात्रों का चयन अब नियमित बात बन चुकी है.

NEET परीक्षा में भी बेहतर परिणाम की उम्मीद

संस्थान प्रबंधन का कहना है कि इस बार NEET परीक्षा में भी बेहतर परिणाम की उम्मीद थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने से छात्रों को मानसिक और शैक्षणिक दोनों स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बावजूद इसके, शिक्षक और प्रबंधन छात्रों का मनोबल बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे दोबारा परीक्षा में पूरे आत्मविश्वास के साथ शामिल हो सकें.

छोटी अनियमितता लाखों छात्रों पर भारी मानसिक तनाव

प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि एक छोटी अनियमितता लाखों छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती है. फिलहाल छात्र एक बार फिर किताबों और नोट्स के बीच लौट चुके हैं, लेकिन उनके मन में यह सवाल अब भी बना हुआ है कि उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन आखिर कब होगा.

छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ना स्वाभाविक- प्रोफेसर डॉ. रोजलीना सिंह

रांची यूनिवर्सिटी के वेलनेस सेंटर की डिप्टी डायरेक्टर एवं साइकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रोजलीना सिंह का कहना है कि NEET-UG परीक्षा रद्द होने और नई तिथि घोषित होने के बाद छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि मनोविज्ञान में यह माना जाता है कि जिन परिस्थितियों को नियंत्रित नहीं किया जा सकता, उन्हें लेकर अत्यधिक चिंता करने से तनाव और बढ़ता है. ऐसे समय में छात्रों को निराशा में डूबने के बजाय अपनी तैयारी की निरंतरता बनाए रखने की जरूरत है.

डॉ. सिंह के अनुसार, परीक्षा टलने से छात्रों का मोमेंटम प्रभावित होता है, लेकिन यही समय मानसिक संतुलन बनाए रखने का भी है. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बार-बार पीछे मुड़कर देखने या परीक्षा रद्द होने की वजहों पर अधिक सोचने के बजाय अपनी तैयारी को और बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए. पढ़ाई को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर करने से मानसिक दबाव कम होता है और एकाग्रता बनी रहती है.

साइकोलॉजिस्ट की सलाह

डॉ. रोजलीना सिंह कहती हैं कि कि लगातार पढ़ाई के बीच छात्रों को कुछ समय अपने पसंदीदा कामों, हॉबीज और एक्स्ट्रा एक्टिविटीज को भी देना चाहिए. संगीत सुनना, हल्की शारीरिक गतिविधियां, परिवार से बातचीत और सकारात्मक माहौल में समय बिताना मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है.

डॉ. रोजलीना सिंह ने यह भी कहा कि तनाव के दौरान उन बातों और चर्चाओं से दूरी बनाना जरूरी है, जो बार-बार दिमाग पर नकारात्मक असर डालती हैं. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे खुद पर भरोसा रखें, नियमित अभ्यास जारी रखें और मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाए रखें, क्योंकि संतुलित मन ही बेहतर प्रदर्शन की सबसे बड़ी कुंजी है.