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दशकों बाद पूरी हुई CDPO की नियुक्ति प्रक्रिया, CM हेमंत सोरेन ने कहा– मेहनत और ईमानदारी से काम करने वालों को मिलेगा इनाम

Ranchi: मुख्यमंत्री ने 62 बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और 237 महिला पर्यवेक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए. सोरेन ने कहा कि अब CDPO और महिला पर्यवेक्षकों के काम की नियमित ‘रैंकिंग’ की जाएगी. जो अधिकारी/कर्मचारी बेहतर काम करेंगे, उनको सरकार की ओर से सम्मान और इनाम मिलेगा.
 
 
JHARKHAND

Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को राजधानी रांची के प्रोजेक्ट भवन सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान 299 नवनियुक्त पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपा. इनमें 62 बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) और 237 महिला पर्यवेक्षक (लेडी सुपरवाइजर) शामिल हैं.

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इस महत्वपूर्ण अवसर पर वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित राज्य सरकार के कई वरीय अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित थे.कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बाल विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता और कुशलता लाने के लिए एक नई पहल की घोषणा की.

उन्होंने कहा कि अब सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षक और आंगनबाड़ी सेविकाओं के कार्यों की नियमित ‘रैंकिंग’ की जाएगी. जो अधिकारी और कर्मी धरातल पर बेहतर परिणाम देंगे, सरकार उन्हें सम्मानित और पुरस्कृत करेगी. सीएम ने स्पष्ट किया कि विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन और जवाबदेही दोनों जरूरी हैं.

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दशकों बाद हुई सीडीपीओ की नियुक्ति

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य गठन के एक लंबे अरसे के बाद सीडीपीओ की नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो पाई है. उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि चयनित अभ्यर्थियों में 50 प्रतिशत महिलाओं ने अपनी योग्यता का लोहा मनवाते हुए बाजी मारी है. सीएम ने कहा, “लाखों अभ्यर्थियों में से आपका चयन होना यह दर्शाता है कि आपमें कुछ विशेष प्रतिभा है. अब इस प्रतिभा का लाभ राज्य की जनता और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मिलना चाहिए.”सामाजिक संकुचन पर मुख्यमंत्री ने जताई चिंता.अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री थोड़े भावुक भी नजर आए.

उन्होंने वर्तमान समाज में बढ़ती छोटी मानसिकता और संवेदनहीनता पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग इतने संकुचित हो गए हैं कि बगल के घर में किसी की मृत्यु हो जाती है और पड़ोसी को पता तक नहीं चलता. ऐसे समाज का क्या औचित्य? आप लोगों को न केवल सरकारी योजनाओं को पहुंचाना है, बल्कि महिलाओं के भीतर छिपे संकोच और उनकी समस्याओं को समझकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है.”

मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को याद दिलाया कि उनकी भूमिका शहर से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक होने वाली है. उन्होंने कहा कि महिलाओं में अक्सर अपनी समस्याओं को लेकर संकोच (Shyness) होता है, जिसे दूर करना आपकी जिम्मेदारी है. सरकार की हर कल्याणकारी योजना राज्य के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचे, इसके लिए आप सभी को एक सेतु के रूप में कार्य करना होगा.