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झारखंड में कोयला चोरी पर CISF का बड़ा एक्शन! ‘Zero Coal Leakage’ Policy से मचेगा हड़कंप

Dhanbad:  झारखंड में अवैध कोयला खनन, चोरी और अवैध ढुलाई पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने सख्ती बढ़ाने की तैयारी की है. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए ‘जीरो कोल लीकेज’ नीति पर जोर दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य कोयला खदानों और उससे जुड़े क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को रोकना, कोयले की चोरी पर प्रभावी नियंत्रण करना और अवैध परिवहन पर कार्रवाई को मजबूत करना है.
 
JHARKHAND

Dhanbad: झारखंड में कोयले की चोरी, अवैध खनन और अवैध ढुलाई पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) अपनी निगरानी और कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है। कोयला क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ‘जीरो कोल लीकेज’ पॉलिसी के तहत अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।

CISF action against illegal coal mining and theft and transportation in Jharkhand

इस रणनीति के तहत अवैध खनन से लेकर कोयले की चोरी और उसकी अवैध ढुलाई तक की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ संभावित चोरी के रास्तों और ठिकानों की पहचान पर भी फोकस किया जा रहा है।

स्वान दस्ते की मदद से संवेदनशील इलाकों की निगरानी

कोयला क्षेत्रों में CISF की रणनीति में प्रशिक्षित स्वान दस्ते की भी अहम भूमिका होगी। जंगलों, खदान क्षेत्रों और ऐसे संवेदनशील स्थानों पर स्वान दस्ते की मदद ली जाएगी, जहां अवैध खनन या कोयला चोरी की आशंका रहती है।

इसके जरिए संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

MMDR एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

CISF अब केवल कोयला परियोजनाओं की सुरक्षा तक सीमित रहने के बजाय खनिज संपदा से जुड़ी चोरी और अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दे रही है।

इसके तहत Mines and Minerals (Development and Regulation) Act यानी MMDR Act के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। खदानों से निकलने वाले कोयले की आवाजाही और उसके संभावित अवैध डायवर्जन पर निगरानी मजबूत करने की योजना है।

अवैध खनन और कोयला चोरी से जुड़े मामलों में स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

ड्रोन और GPS से होगी हाईटेक निगरानी

कोयला क्षेत्रों में निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। इसमें ड्रोन सर्विलांस, वाहनों की GPS ट्रैकिंग और डेटा एनालिसिस जैसी तकनीकें शामिल हैं।

इन तकनीकों को इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और जरूरत पड़ने पर त्वरित प्रतिक्रिया की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

CISF अधिकारियों के मुताबिक, कोयला क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ बेहतर तालमेल जरूरी है। इसके तहत कोयला चोरी के लिए इस्तेमाल होने वाले संभावित रास्तों और ठिकानों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

CISF DG ने दिए कोयला चोरी रोकने के निर्देश

CISF के डीजी प्रवीर रंजन ने पिछले दिनों रांची में हुई समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को कोयला चोरी रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए थे। समीक्षा बैठक में कोयला क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर चर्चा की गई।

इसके बाद संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

मगध और आम्रपाली परियोजनाओं पर विशेष फोकस

झारखंड में मगध और आम्रपाली कोयला परियोजनाएं CISF की इस रणनीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। इन परियोजनाओं में कोयले की सुरक्षा के लिए CISF की तैनाती और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, आम्रपाली परियोजना में शुरुआती तौर पर करीब 200 CISF जवानों की तैनाती की गई है। इसे आगे बढ़ाकर करीब 1,700 जवानों तक किए जाने की योजना बताई गई है।

इससे परियोजना क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ कोयले की चोरी, अवैध खनन और अवैध ढुलाई पर निगरानी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

‘जीरो कोल लीकेज’ पर पूरा जोर

CISF की नई रणनीति का मुख्य उद्देश्य कोयला परियोजनाओं से होने वाले अवैध कोयला लीकेज को रोकना है। इसके लिए मानव निगरानी के साथ तकनीकी सर्विलांस, स्वान दस्ते, GPS ट्रैकिंग और ड्रोन जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।

स्थानीय पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय के जरिए अवैध खनन और चोरी से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई को मजबूत करने पर भी जोर है। आने वाले समय में कोयला क्षेत्रों में इस निगरानी और कार्रवाई का दायरा और बढ़ने की संभावना है।