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Dumka News: ब्रिटिश काल के ऐतिहासिक मैदान में फहराएंगे राज्यपाल तिरंगा, जानें क्या है इतिहास

Dumka: झारखंड की उपराजधानी दुमका का ऐतिहासिक पुलिस लाइन मैदान इस बार भी स्वतंत्रता दिवस समारोह का गवाह बनेगा. 15 अगस्त को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार यहां तिरंगा फहराएंगे. ब्रिटिश शासनकाल में स्थापित इस पुलिस लाइन में आज भी पुराने बैरक मौजूद हैं. झारखंड गठन के बाद से यहां गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता दिवस पर राज्यपाल के ध्वजारोहण की परंपरा जारी है.
 
JHARKHAND

Dumka: झारखंड की उपराजधानी दुमका का पुलिस लाइन मैदान इस बार भी स्वतंत्रता दिवस के राजकीय समारोह का गवाह बनेगा। 15 अगस्त को झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार इसी ऐतिहासिक मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर मैदान को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

Police Line Ground of British time

दुमका में झारखंड राज्य के गठन के बाद से एक खास परंपरा चली आ रही है। इसके तहत गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता दिवस पर राज्यपाल पुलिस लाइन मैदान में तिरंगा फहराते हैं। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष भी राज्यपाल यहां राजकीय समारोह में शामिल होंगे।

ब्रिटिश हुकूमत के समय स्थापित हुई थी पुलिस लाइन

दुमका का पुलिस लाइन मैदान सिर्फ समारोह स्थल नहीं, बल्कि अपने अंदर इतिहास भी समेटे हुए है। इसकी स्थापना अंग्रेजी शासनकाल में हुई थी। उस दौर में यहां पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए बैरक बनाए गए थे, जहां जवान रहते थे और सैन्य प्रशिक्षण लेते थे।

जानकारी के अनुसार, अंग्रेजी शासन के दौरान इसी क्षेत्र से संथाल परगना के बड़े हिस्से की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित किया जाता था। पुलिस लाइन के आसपास फायरिंग और अन्य प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की गई थी।

DUMKA POLICE LINE GROUND

1855 में संथाल परगना का गठन, दुमका बना मुख्यालय

वरीय पत्रकार और व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता शिवशंकर चौधरी के अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से ब्रिटिश शासन में वर्ष 1855 में भागलपुर और बीरभूम के कुछ हिस्सों को अलग कर संथाल परगना का गठन किया गया था। दुमका को इसका जिला मुख्यालय बनाया गया।

इसके बाद प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने और आम लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल की आवश्यकता महसूस हुई। इसी उद्देश्य से दुमका शहर से करीब दो किलोमीटर दूर, कुसुमडीह जोरिया के किनारे पुलिस लाइन स्थापित की गई।

आज भी मौजूद हैं अंग्रेजों के जमाने के बैरक

पुलिस लाइन में पुलिसकर्मियों के रहने के लिए बनाए गए कुछ पुराने बैरक आज भी मौजूद हैं। यह परिसर दुमका के ऐतिहासिक अतीत की याद दिलाता है।

ब्रिटिश काल में इसी स्थान पर सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण दिया जाता था। सैन्य और प्रशासनिक दृष्टि से भी पुलिस लाइन महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

DUMKA POLICE LINE GROUND

आजादी के बाद शुरू हुए राष्ट्रीय पर्व के कार्यक्रम

देश की आजादी के बाद पुलिस लाइन मैदान में 26 जनवरी और 15 अगस्त के अवसर पर समारोह आयोजित होने लगे। ध्वजारोहण के साथ खेलकूद प्रतियोगिताएं, आकर्षक झांकियां और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने लगे।

इन आयोजनों का उद्देश्य बच्चों और आम लोगों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करने के साथ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और संदेशों को लोगों तक पहुंचाना भी रहा है।

झारखंड बनने के बाद बनी खास परंपरा

15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। उस समय बाबूलाल मरांडी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। इसके बाद दुमका को उपराजधानी का दर्जा दिया गया और यहां राष्ट्रीय पर्वों के राजकीय समारोह आयोजित करने की परंपरा स्थापित हुई।

इसके तहत गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता दिवस पर राज्यपाल पुलिस लाइन मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं।

2001 में बाबूलाल मरांडी ने पहली बार फहराया था तिरंगा

उपराजधानी बनने के बाद 26 जनवरी 2001 को तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पहली बार पुलिस लाइन मैदान में तिरंगा फहराया था। इसके बाद से दुमका में राष्ट्रीय पर्वों पर मुख्यमंत्री और राज्यपाल के ध्वजारोहण की परंपरा लगातार जारी है।

15 अगस्त को राज्यपाल करेंगे ध्वजारोहण

इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार पुलिस लाइन मैदान में तिरंगा फहराएंगे। समारोह को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

मैदान को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। गणमान्य नागरिकों के साथ आम लोगों के बैठने की व्यवस्था भी की गई है। इसके लिए स्थायी शेड का निर्माण कराया गया है।

ऐतिहासिक विरासत और राजकीय परंपरा को समेटे दुमका का पुलिस लाइन मैदान एक बार फिर 15 अगस्त को देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आएगा।