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मोरहाबादी में दशहरा का धमाका! रावण के साथ जलेगी इस बार जलेगी दो मंजिला ‘सोने की लंका’!

राजधानी के मोरहाबादी मैदान में इस बार दशहरा पर रावण दहन के साथ दो मंजिला प्रतीकात्मक ‘सोने की लंका’ का दहन भी आकर्षण का केंद्र बनेगा. रांची में रावण दहन की परंपरा वर्ष 1948 में शुरू हुई थी. बताया जाता है कि देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान से रांची आए शरणार्थियों ने इसकी शुरुआत की थी.
 
RANCHI

Ranchi:  राजधानी रांची में विजयादशमी के अवसर पर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व भव्य अंदाज में मनाने की तैयारियां पूरी हो गई हैं। शहर के मोरहाबादी मैदान, अरगोड़ा मैदान और एचईसी के शालीमार मैदान समेत कई स्थानों पर रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विशालकाय पुतलों, रंग-बिरंगी आतिशबाजी, रामलीला और आकर्षक लाइटिंग के बीच इस बार दशहरा का उत्सव खास होने वाला है।

ravana dahan IN ARGORA

मोरहाबादी मैदान में पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से आयोजित होने वाला रावण दहन मुख्य आकर्षण रहेगा। यहां 70 फीट ऊंचे रावण, 65 फीट के कुंभकर्ण और 60 फीट के मेघनाद के पुतले तैयार किए गए हैं। वहीं अरगोड़ा मैदान में 55 फीट ऊंचे रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के 50-50 फीट के पुतले दहन किए जाएंगे।

मोरहाबादी में दिखेगा भव्य आतिशबाजी का नजारा

मोरहाबादी मैदान में दशहरा आयोजन को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। पंजाबी हिंदू बिरादरी के महासचिव राकेश मेहरा के अनुसार, कार्यक्रम में रामलीला के मंचन के साथ पारंपरिक गीत-संगीत और आकर्षक आतिशबाजी देखने को मिलेगी। इस बार आकाशीय आतिशबाजी, वाटरफॉल आतिशबाजी और लेजर शो दर्शकों के लिए खास आकर्षण होंगे।

ravana dahan IN MORABADI AND ARGORA

आयोजन स्थल पर 30×30 फीट की दो मंजिला प्रतीकात्मक स्वर्ण लंका भी तैयार की गई है, जिसका दहन कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए स्वयंसेवकों की तैनाती और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की गई है।

ravana dahan IN MORABADI AND ARGORA

रांची में रावण दहन का इतिहास

रांची में रावण दहन का इतिहास आजादी के बाद के शुरुआती वर्षों से जुड़ा है। बताया जाता है कि वर्ष 1948 में पाकिस्तान से आए शरणार्थियों ने दशहरा के अवसर पर इस परंपरा की शुरुआत की थी। तब से यह आयोजन लगातार रांची की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बना हुआ है।

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जानकारों के मुताबिक, आजादी से पहले देश के सीमित स्थानों पर ही रावण दहन का आयोजन होता था। विभाजन के बाद रांची पहुंचे शरणार्थियों ने यहां दशहरा के अवसर पर रावण दहन कार्यक्रम शुरू किया। धीरे-धीरे यह आयोजन शहर के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल हो गया।

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समय के साथ मोरहाबादी मैदान में होने वाले रावण दहन कार्यक्रम का स्वरूप भव्य होता गया। इस वर्ष विशालकाय रावण के पुतले के साथ दो मंजिला ‘सोने की लंका’ का दहन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेगा। आयोजन के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा।

राज्यपाल करेंगे रावण दहन, कई प्रमुख हस्तियां होंगी शामिल

मोरहाबादी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। आयोजन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ कुंभकर्ण और पूर्व मंत्री एवं स्थानीय विधायक सीपी सिंह मेघनाद के पुतले का दहन करेंगे।

इस वर्ष मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मातृशोक के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन से भी सहयोग मिल रहा है।

अरगोड़ा मैदान में भी होगा भव्य आयोजन

अरगोड़ा मैदान में श्री दुर्गा पूजा एवं रावण दहन समिति की ओर से दशहरा उत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यहां 55 फीट ऊंचे रावण के साथ 50-50 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले खड़े किए गए हैं। पुतलों का निर्माण बिहार के गया से आए कारीगरों ने किया है।

समिति के उप कोषाध्यक्ष शिव प्रसाद साहू के अनुसार, कार्यक्रम में आतिशबाजी के बाद रावण दहन किया जाएगा। मैदान में दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सजावट, बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की गई है। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को तैनात किया जाएगा।

1948-49 से चली आ रही है मोरहाबादी की परंपरा

मोरहाबादी मैदान में रावण दहन का इतिहास काफी पुराना है। पंजाबी हिंदू बिरादरी ने देश के विभाजन के बाद रांची आए लोगों के बीच वर्ष 1948-49 में रावण वध और लंका दहन की परंपरा शुरू की थी। कोरोना काल को छोड़कर यह आयोजन लगातार होता रहा है। समय के साथ कार्यक्रम का स्वरूप भव्य हुआ है और पुतलों का आकार भी बढ़ता गया है।

इस वर्ष भी गया से आए कारीगरों ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार किए हैं। आयोजकों का कहना है कि पुतलों के बढ़ते आकार के माध्यम से समाज में बढ़ती बुराइयों के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष जोर

दशहरा के अवसर पर विभिन्न मैदानों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए आयोजकों ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। बैरिकेडिंग, स्वयंसेवकों की तैनाती और जिला प्रशासन के सहयोग से कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की तैयारी है।

रांची में दशहरा का यह उत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक आतिशबाजी का संगम बनेगा। विशालकाय पुतलों के दहन के साथ शहर में बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा।