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विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद भी DSPMU बदहाल, छात्रों को अब तक नहीं मिल रहीं बुनियादी सुविधाएं

Ranchi: रांची स्थित Dr. Shyama Prasad Mukherjee University को विश्वविद्यालय का दर्जा मिले काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब भी यहां बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है. छात्रों का आरोप है कि कैंपस में पेयजल, साफ-सफाई, स्मार्ट क्लास, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था और आधुनिक लैब जैसी सुविधाएं अब तक पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी हैं.
 
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Ranchi: रांची स्थित Dr. Shyama Prasad Mukherjee University को विश्वविद्यालय का दर्जा मिले काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब भी यहां बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है. छात्रों का आरोप है कि कैंपस में पेयजल, साफ-सफाई, स्मार्ट क्लास, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था और आधुनिक लैब जैसी सुविधाएं अब तक पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार सुधार के दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत छात्रों की परेशानियां कम नहीं कर पा रही. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बावजूद DSPMU कब पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से लैस हो पाएगा.

डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय: NIEPA नई दिल्ली ने DSPMU रांची को  बनाया शोध अध्ययन केंद्र - Dr Shyama Prasad Mukherjee University Ranchi  NIEPA New Delhi made DSPMU Ranchi ...

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), रांची आज झारखंड के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है. पहले यह संस्थान रांची कॉलेज के नाम से जाना जाता था, जिसकी स्थापना वर्ष 1926 में हुई थी. लंबे समय तक रांची विश्वविद्यालय के अधीन संचालित होने के बाद 11 अप्रैल 2017 को इसे स्वतंत्र राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा मिला. तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद यह आधिकारिक रूप से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय बना.

विश्वविद्यालय बनने का उद्देश्य पूरा नहीं

विश्वविद्यालय में अपग्रेड करने के पीछे सरकार और शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य यह था कि झारखंड के आदिवासी, मूलवासी, स्थानीय और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल और आधुनिक सुविधाएं मिल सकें. रांची कॉलेज के समय से ही यहां बड़ी संख्या में जनजातीय और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी पढ़ाई करते रहे हैं. ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि विश्वविद्यालय बनने के बाद यहां शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

हालांकि, विश्वविद्यालय बनने के लगभग नौ वर्ष बाद भी छात्रों का आरोप है कि संस्थान की स्थिति में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है. छात्रों का कहना है कि प्रशासनिक भवनों और कुछ कार्यालयों को जरूर आधुनिक रूप दिया गया है, लेकिन कैंपस की मूल समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं. विश्वविद्यालय परिसर में जगह-जगह गंदगी और कचरे का अंबार देखने को मिलता है. कई शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि वहां जाना मुश्किल हो गया है. छात्र-छात्राओं का कहना है कि पीने के स्वच्छ पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है. गर्मी के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है.

DSPMU Ranchi

वहीं छात्राओं के लिए अलग से बेहतर कॉमन रूम की व्यवस्था नहीं होने को लेकर भी नाराजगी है. छात्रों का आरोप है कि सुविधाओं में सुधार किए बिना लगातार फीस वृद्धि की जा रही है. हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा फीस बढ़ोतरी के निर्णय के बाद छात्रों में आक्रोश बढ़ गया है. विभिन्न छात्र संगठनों ने इसको लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है. छात्रों का कहना है कि जब विश्वविद्यालय में मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हैं, तब फीस बढ़ाना छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा है.

DSPMU Ranchi

कई छात्रों का कहना है कि DSPMU में बड़ी संख्या में गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं. ऐसे में फीस वृद्धि का सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ेगा. छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पहले सुविधाएं बहाल करने और उसके बाद ही किसी प्रकार की फीस बढ़ोतरी करने की मांग की है.

DSPMU Ranchi

मामले को लेकर जब कुलपति प्रोफेसर राजीव मनोहर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल ही में पदभार ग्रहण किया है. विश्वविद्यालय की समस्याओं को गंभीरता से देखा और समझा जा रहा है. उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास तेज किए गए हैं और आने वाले समय में DSPMU को एक आदर्श विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा.

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हालांकि छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के आश्वासन अब तक जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि DSPMU प्रशासन छात्रों की समस्याओं का समाधान कितनी तेजी और गंभीरता से कर पाता है.