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झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव में पहली बार महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित, पहली बार 25 में से 7 सीटें महिलाओं को मिली...

Ranchi: झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव के लिए उम्मीदवारों का जोश चरम पर है. रांची सिविल कोर्ट और बार एसोसिएशन कार्यालयों समेत अलग-अलग कोर्ट परिसर प्रत्याशियों के बैनर और पोस्टर से सजे हुए हैं. पुरुष प्रत्याशियों के साथ दो-दो हाथ करने की तैयारी में जुटी महिला प्रत्याशियों का उत्साह देखते ही बन रहा है. होली की छुट्टी के बावजूद महिला प्रत्याशी मतदाताओं से वोट का आग्रह करने में जुटी हैं.
 
JHARKHAND

Ranchi: झारखंड स्टेट बार काउंसिल का यह चुनाव महिलाओं के लिए खास है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद, स्टेट बार चुनाव में पहली बार महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व की गई हैं. 12 मार्च को होने वाले 25 स्टेट बार सीटों के चुनाव में, महिलाओं के लिए रिजर्व की गई पांच सीटें चुनाव के जरिए भरी जाएंगी, जबकि दो सीटें मनोनयन से भरी जाएंगी.

इस तरह, 25 में से सात सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व कर दी गई हैं. इस चुनाव में कुल 100 प्रत्याशियों में से 25 महिलाएं ताल ठोक रहीं है. इस चुनाव में राज्यभर के विभिन्न न्यायालयों के करीब 25 हजार मतदाता बने अधिवक्ता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.

झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव के लिए उम्मीदवारों का जोश चरम पर है. रांची सिविल कोर्ट और बार एसोसिएशन कार्यालयों समेत अलग-अलग कोर्ट परिसर प्रत्याशियों के बैनर और पोस्टर से सजे हुए हैं. पुरुष प्रत्याशियों के साथ दो-दो हाथ करने की तैयारी में जुटी महिला प्रत्याशियों का उत्साह देखते ही बन रहा है. होली की छुट्टी के बावजूद महिला प्रत्याशी मतदाताओं से वोट का आग्रह करने में जुटी हैं.

करीब आठ साल बाद फिर से यह चुनाव लड़ रहे संजय विद्रोही कहते हैं, "यह चुनाव करीब आठ साल बाद हो रहा है. मुझे उम्मीद है कि हमें पहले की तरह हमारे अधिवक्ता भाइयों का आशीर्वाद मिलेगा." उन्होंने आगे कहा, "मेरे पिछले कार्यकाल में कई काम हुए हैं, जिसका हमें जरूर फायदा मिलेगा."

इस बीच, वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही महिला प्रत्याशी रिंकू भगत कहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व करके महिला सशक्तिकरण के लिए बड़ा काम किया है. यही वजह है कि इतनी सारी महिलाएं पहली बार चुनावी मैदान में उतरी हैं. उन्होंने आगे कहा कि पिछले चुनावों में लगभग कोई महिला प्रत्याशी नहीं होती थी, जबकि इस बार 25 महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं. जीत का दावा करते हुए उन्होंने कहा, "हमें पहले की तरह अधिवक्ताओं का सहयोग जरूर मिलेगा."

पहली बार चुनाव लड़ रही वर्षा श्रीवास्तव कहती हैं, "यह मेरे लिए एक नया अनुभव है, और मैं इसके लिए मतदाताओं के बीच जाकर आग्रह कर रही हूं." इस चुनाव में महिलाओं के लिए सीटें रिजर्व होने पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा, "यह एक अच्छी पहल है, इससे सहभागिता बढ़ती है और काम बेहतर तरीके से हो पाता है."

बहरहाल, चुनाव के माहौल में कौन जीतेगा और कौन हारेगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन जिस तरह से महिलाओं ने इस चुनाव में दिलचस्पी दिखाई है, वह सच में महिला सशक्तिकरण का एक उदाहरण बन रहा है.