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माहवारी पर जागरूकता फैलाने बिरहोर टोला पहुंचीं छात्राएं, ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों को माहवारी स्वच्छता की दी जानकारी

Hazaribagh: 'चुप्पी तोड़ो अभियान' के जरिए किशोरियों को मासिक धर्म माहवारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है. साथ ही किशोरियों को नि:शुल्क सेनेटरी पैड बांटे गए. छात्राओं ने जिले के सुदूरवर्ती चुरचू प्रखंड के नगड़ी बिरहोर टोला का चयन किया. टीम की महिला सदस्यों ने बिरहोर महिलाओं एवं किशोरियों से संवाद स्थापित कर माहवारी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की.
 
JHARKHAND

Hazaribagh: इन दिनों छात्राओं की टोली ने 'अर्थ एक प्रयास' के तहत 'चुप्पी तोड़ो अभियान' की शुरुआत की है. छात्राओं ने जिले के सुदूरवर्ती चुरचू प्रखंड के नगड़ी बिरहोर टोला की किशोरियों एवं महिलाओं को मासिक धर्म माहवारी के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया. इसके साथ ही किशोरियों को नि:शुल्क सेनेटरी पैड बांटे गए, इन्हें उपयोग में कैसे लाना है? इस बारे में जानकारी दी गई.

माहवारी से जुड़ी कई जानकारियां की साझा

'चुप्पी तोड़ो अभियान' के जरिए किशोरियों को मासिक धर्म माहवारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है. साथ ही किशोरियों को नि:शुल्क सेनेटरी पैड बांटे गए. छात्राओं ने जिले के सुदूरवर्ती चुरचू प्रखंड के नगड़ी बिरहोर टोला का चयन किया. टीम की महिला सदस्यों ने बिरहोर महिलाओं एवं किशोरियों से संवाद स्थापित कर माहवारी से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की.

माहवारी के दौरान साफ-सफाई पर जोर

टीम ने बताया मासिक धर्म महिलाओं के जीवन की एक सामान्य एवं प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे लेकर समाज में शर्म या संकोच नहीं बल्कि जागरूकता और समझ की आवश्यकता है. महिलाओं को सेनेटरी पैड के सही उपयोग, व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों तथा माहवारी के दौरान साफ-सफाई बनाए रखने के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी.

संवाद के दौरान यह भी सामने आया कि वर्तमान समय में भी कई ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में माहवारी को लेकर जागरूकता की कमी एवं कुछ रूढ़िवादी परंपराएं प्रचलित हैं. संस्था ने महिलाओं को इन भ्रांतियों से बाहर निकलकर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया. साथ ही जरूरतमंद महिलाओं एवं किशोरियों के बीच निःशुल्क सेनेटरी पैड का वितरण भी किया गया.

टीम के सदस्यों ने बताया कि माहवारी एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जिसे छुपाने या शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है. पैड को हर 4 से 6 घंटे में बदलना चाहिए. गंदे कपड़े या पुराने तरीकों का उपयोग संक्रमण का कारण बन सकता है. इस्तेमाल किए गए पैड को पेपर में लपेटकर कूड़ेदान में फेंकना चाहिए, कभी भी शौचालय में नहीं बहाना चाहिए. माहवारी के दौरान अचार को छूने, रसोई में जाने या अशुद्ध मानने जैसी गलत धारणाओं पर चर्चा कर उन्हें दूर किया गया.

कॉलेज के छात्र-छात्राएं समाज के प्रति अपने दायित्व को पूरा करते हुए किशोरियों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं. इनका यह प्रयास काबिल-ए-तारीफ हैे. जरूरत है समाज के अन्य लोग जो सक्षम हैं, वे वैसे तबके के लिए खड़े हों जिन्हें मदद और जागरूकता की आवश्यकता है: सना नूरी, सदस्य, अर्थ एक प्रयास