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छिन्नमस्तिका मंदिर दुकानदारों के पुनर्वास मामले में हाईकोर्ट का कड़ा रुख, राज्य सरकार से मांगी प्रगति रिपोर्ट

Jharkhand HighCourt: रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर से हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास के मुद्दे पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने स्पष्ट कहा है कि विस्थापित दुकानदारों के पुनर्वास में अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं है और राज्य सरकार व संबंधित प्रशासन को निर्धारित समय-सीमा में ठोस कदम उठाने होंगे.
 
JHARKHAND

Jharkhand HighCourt: रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर से हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास के मुद्दे पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने स्पष्ट कहा है कि विस्थापित दुकानदारों के पुनर्वास में अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं है और राज्य सरकार व संबंधित प्रशासन को निर्धारित समय-सीमा में ठोस कदम उठाने होंगे. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन को कई अहम निर्देश दिए. सुनवाई के दौरान अदालत ने मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और पुनर्निर्माण से संबंधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर कोर्ट के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए.रामगढ़ के मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू,  दुकानदारों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट

मामला क्या है

मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के मद्देनज़र प्रशासन ने पूर्व में दुकानों को हटाया था। इसके बाद से ही विस्थापित दुकानदार पुनर्वास की मांग कर रहे थे। इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासन से अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तलब की.

Jharkhand High Court: छिन्नमस्तिका मंदिर से हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास  पर हाईकोर्ट सख्त, दिए निर्देश

सुनवाई के दौरान रामगढ़ के उपायुक्त वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि मंदिर परिसर से हटाए गए 254 दुकानदारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. उपायुक्त ने कहा कि पहले इन दुकानदारों को मंदिर के निकट अस्थायी रूप से पुनर्वासित किया जाएगा. इसके बाद उनके लिए स्थायी दुकानों का निर्माण कर उन्हें बसाया जाएगा. उपायुक्त ने मंदिर पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण से जुड़े मास्टर प्लान को अगली सुनवाई में पेश करने के लिए समय मांगा. अदालत ने प्रशासन की बात सुनने के बाद अगली तारीख तक विस्तृत योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट की चिंता

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान भैरवी नदी के डेंजर जोन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. अदालत ने मौखिक रूप से निर्देश दिया कि नदी के खतरनाक हिस्सों में दो स्तर की बैरिकेडिंग की जाए. कोर्ट ने कहा कि तत्काल प्रभाव से लो-लेवल बैरिकेडिंग लगाई जाए, जबकि बरसात के मौसम में हाई-लेवल बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो. अदालत ने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी प्रकार की लापरवाही न हो.

सुनवाई के दौरान उपायुक्त ने अदालत को बताया कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के बैठने के लिए दरी बिछाई जाएगी और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी. इसके अलावा वन भूमि पर कब्जा कर दुकान लगाने वाले अतिक्रमणकारियों को हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी. प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि का उपयोग मंदिर के पुनर्निर्माण और विकास कार्यों में किया जाएगा.

15 मई को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 मई की तारीख निर्धारित की है. अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान भी रामगढ़ उपायुक्त व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें और डीपीआर व मास्टर प्लान कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें. इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता भारत कुमार ने पक्ष रखा. प्रार्थी संजीव कुमार सिंह ने अवमानना याचिका दायर कर हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की है.

इससे पहले दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने वर्ष 2023 में मंदिर परिसर और भैरवी नदी तट के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे. अदालत ने भैरवी नदी के दोनों किनारों पर स्थायी स्नान घाट बनाने, शौचालय, चेंजिंग रूम और बाथरूम की व्यवस्था करने को कहा था. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि घाट से मंदिर तक जाने वाले रास्तों को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त चेंजिंग रूम बनाए जाएं. इसके अलावा सफाई व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और कतार परिसर में शौचालयों की नियमित देखरेख सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया था.

मेडिकल सुविधा और पेयजल व्यवस्था पर भी जोर

हाईकोर्ट ने प्रशासन को मंदिर परिसर में पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था. अदालत ने कहा था कि श्रद्धालुओं के लिए नियमित अंतराल पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए. इसके साथ ही मंदिर के पास 24 घंटे प्राथमिक चिकित्सा सुविधा और त्योहारों के दौरान मोबाइल मेडिकल यूनिट उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया था. अदालत ने कहा था कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं.