खसरा संक्रमण रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल, बच्चों को पिलाई जा रही VITAMIN-A दवा
Pakud: पड़ोसी देश बांग्लादेश में अप्रैल महीने से फैले खसरे (मीजल्स) के घातक प्रकोप को देखते हुए झारखंड का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है. वहां बच्चों की मौत और बढ़ते संक्रमण की खबरों के बाद, भारत और राज्य सरकार की गाइडलाइन के तहत सीमावर्ती संथाल परगना प्रमंडल और विशेष रूप से पाकुड़ जिले में अलर्ट जारी कर निगरानी तेज कर दी गई है.

इस खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने खसरे के लक्षण, बचाव और संक्रमित बच्चों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों के भरपूर सहयोग से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. साथ ही, पाकुड़ जिले में संक्रमण को रोकने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम द्वारा सर्वे किया जा रहा है और प्रभावित गांवों के बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जा रही है. स्वास्थ्य महकमे की इस त्वरित सक्रियता से पाकुड़ में स्थिति नियंत्रण में है.

पाकुड़ में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ एसके झा ने बताया कि पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में खसरा संक्रमण फैलने के बाद पाकुड़ जिले में इसका प्रभाव न पड़े, इसके लिए रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है. टीम की बेहतर प्रयास और लोगों के सहयोग की वजह से ग्रसित बच्चों को चिन्हित किया गया और उन्हें इलाज की सुविधा मुहैया कराई गई.
डॉ एसके झा ने बताया कि खसरा एक गंभीर बिमारी है. इसकी चपेट में आने से निमोनिया, इंकेप्लाइटिस, नेत्रहिनता, डायरिया जैसी बिमारी शुन्य से पांच वर्ष आयु के बच्चों में फैलती है. अगर इसका सही समय पर इलाज नहीं हुआ तो संक्रमित बच्चे की मौत भी हो सकती है. उन्होंने बताया कि खसरा बिमारी से ग्रसित मरीज के छिकने, खांसने से नजदीक रहने वाले बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. डॉ झा ने बताया कि खसरा से ग्रसित बच्चे को तेज बुखार, सर्दी, खांसी, आंख लाल, नाक का बहना, शरीर में दाना होना आदि ऐसे लक्षण है. जिससे ग्रसित मरीजों की पहचान आसानी से हो जाती है.
डॉ एसके झा ने बताया कि पाकुड़ सदर प्रखंड के न्यू अंजना, रणडांगा, जानकीनगर, कालीदासपुर में 80 और हिरणपुर प्रखंड के मोहनपुर गांव में 2 बच्चे खसरा से ग्रसित पाए गए थे. जिनका इलाज बीते अप्रैल माह में किया गया. डॉ झा ने बताया कि मई माह में सर्वे के क्रम में एक भी खसरा संक्रमण से प्रभावित मरीज नहीं मिला है.
उन्होंने बताया कि जिन गांवों में संक्रमित मरीज पाया गया, उस गांव के सभी बच्चों का जांच हुआ. इसके बाद संक्रमित के अलावा अन्य बच्चों को भी विटामिन ए का खुराक दिया गया, ताकि अन्य कोई भी बच्चा संक्रमण की चपेट में न आए. उन्होंने बताया कि इस बिमारी की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग नजर बनाए हुए हैं. डॉ झा ने बताया कि खसरा बिमारी उन बच्चों में फैलने की सबसे ज्यादा संभावना रहती है, जो प्रतिरक्षण की कड़ी से वंचित रहे हैं.







