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आज से शुरू सुनवाई, SIR नोटिस आया तो क्या करें? दस्तावेज से लेकर सुनवाई तक जानें हर जरूरी बात

Ranchi: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत नोटिस पाने वाले मतदाताओं के मामलों की सुनवाई 24 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है. राज्य में करीब 63.24 लाख मतदाताओं को सत्यापन और जांच के लिए नोटिस जारी किए गए हैं.
 
Jharkhand

Ranchi: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत सोमवार, 24 अगस्त 2026 से नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं के मामलों की सुनवाई शुरू हो रही है। यह प्रक्रिया उन मतदाताओं के लिए अहम है, जिनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं या जिनके रिकॉर्ड में किसी तरह की विसंगति पाई गई है।

निर्वाचन विभाग के अनुसार, राज्य में कुल 63,24,116 मतदाताओं को अलग-अलग श्रेणियों में नोटिस जारी किया जाना है। इनमें 14,03,205 अनमैप्ड मतदाता45,55,227 तार्किक विसंगति वाले मतदाता और 3,65,684 समान या मिलते-जुलते जनसांख्यिकीय विवरण वाले मतदाताशामिल हैं। इन मामलों की जांच और सुनवाई के बाद ही अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी।

नोटिस मिला है तो क्या करें?

अगर आपको SIR के तहत नोटिस मिला है, तो उसे नजरअंदाज न करें। नोटिस में दी गई सुनवाई की तारीख, स्थान और संबंधित अधिकारी की जानकारी सबसे पहले जांच लें।

निर्धारित तारीख पर संबंधित चुनाव अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपने दावे के समर्थन में उपलब्ध जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सुनवाई के दौरान मतदाता से उसके नाम, पते, परिवार और मतदाता सूची में दर्ज विवरण से जुड़ी जानकारी मांगी जा सकती है।

मतदाता को सलाह दी जाती है कि सुनवाई से पहले सभी संबंधित दस्तावेज व्यवस्थित कर लें और नोटिस की एक प्रति भी अपने साथ रखें।

किन मतदाताओं को जारी किया जा रहा है नोटिस?

SIR के दौरान अलग-अलग तरह की विसंगतियां मिलने वाले रिकॉर्ड सत्यापन के दायरे में हैं। इनमें अनमैप्ड मतदाता, माता-पिता के नाम से संबंधित रिकॉर्ड में गड़बड़ी, मतदाता और अभिभावक की उम्र में असामान्य अंतर तथा अन्य तार्किक विसंगतियां शामिल हैं।

निर्वाचन विभाग ने ऐसी 15 प्रकार की तार्किक विसंगतियों की पहचान की है। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता से रिकॉर्ड को सही साबित करने के लिए अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं है तो क्या करें?

SIR के दौरान जिन पात्र मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं है, उन्हें भी अपना नाम शामिल कराने का अवसर दिया गया है।

ऐसे पात्र मतदाता दावा-आपत्ति की निर्धारित अवधि में Form-6 और जरूरी घोषणा पत्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। दावा-आपत्ति की अवधि 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक निर्धारित है।

इसलिए जिन पात्र मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना दावा जरूर दाखिल करना चाहिए।

सुनवाई और सत्यापन की प्रक्रिया कब तक?

निर्वाचन विभाग के कार्यक्रम के अनुसार नोटिस, सुनवाई और सत्यापन की प्रक्रिया 3 अक्टूबर 2026 तक पूरी की जानी है। इसके बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

इसका मतलब है कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए तय समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखना बेहद महत्वपूर्ण है।

SIR के दायरे में 63 लाख से ज्यादा मतदाता

झारखंड में SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले करीब 2.64 करोड़ मतदाता दर्ज थे। ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 2.21 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल हैं।

SIR की गणना और सत्यापन के दौरान मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, अनुपलब्ध या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं समेत अलग-अलग श्रेणियों के रिकॉर्ड की जांच की गई है।

मतदाताओं के लिए जरूरी सलाह

नोटिस मिलने पर घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले नोटिस को ध्यान से पढ़ें और उसमें दी गई तारीख, समय, स्थान और अधिकारी की जानकारी नोट कर लें।

इसके बाद अपने नाम, पते, परिवार और मतदाता रिकॉर्ड से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज तैयार रखें। निर्धारित तारीख पर सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें।

अगर किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो वह निर्धारित अवधि में Form-6 के जरिए दावा दाखिल कर सकता है।

निर्वाचन आयोग और झारखंड निर्वाचन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR, दावा-आपत्ति और मतदाता सूची से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई है। मतदाताओं को किसी भी जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने और अनधिकृत दावों से बचने की सलाह दी जाती है।

एक नजर में महत्वपूर्ण तारीखें

  • 24 अगस्त 2026: नोटिस वाले मामलों की सुनवाई शुरू
  • 4 सितंबर 2026: दावा-आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तिथि
  • 3 अक्टूबर 2026: नोटिस, सुनवाई और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा
  • 7 अक्टूबर 2026: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन

जरूरी बात: SIR का नोटिस मिलना अपने आप में नाम हटाए जाने का अंतिम निर्णय नहीं है। संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है।