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सड़क हादसों में मददगार बनना पड़ रहा भारी, गुड सेमेरिटन योजना का लाभ नहीं पहुंच रहा लोगों तक

Dhanbad: धनबाद में यह योजना अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी है. जिले में पिछले छह वर्षों के दौरान सैकड़ों सड़क हादसे हुए. इन हादसों में कई लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए घायलों को अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई, लेकिन अब तक किसी भी मददगार को इस योजना का लाभ नहीं मिल सका.
 
JHARKHAND

Dhanbad: सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में ‘गुड सेमेरिटन’ यानी नेक मददगार योजना लागू की थी. इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को सम्मान और प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है.

जान बचाने वालों को नहीं मिल रहा सम्मान! कागजों में दम तोड़ रही गुड सेमेरिटन  योजना

धनबाद में यह योजना अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी है. जिले में पिछले छह वर्षों के दौरान सैकड़ों सड़क हादसे हुए. इन हादसों में कई लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए घायलों को अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई, लेकिन अब तक किसी भी मददगार को इस योजना का लाभ नहीं मिल सका. विभागीय सुस्ती, जागरूकता की कमी और समन्वय के अभाव के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना कागजों तक सीमित होकर रह गई है.

सरकारी दिशा-निर्देश और प्रावधान

सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 2 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जानी है. यदि दो या उससे अधिक लोग मिलकर घायल की मदद करते हैं तो उन्हें संयुक्त रूप से 5 हजार रुपये तक की राशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करने का प्रावधान है. योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग कानूनी प्रक्रिया के डर से घायल की मदद करने से पीछे न हटें और समय रहते अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचा सकें.

क्या होता है गोल्डन ऑवर

आपातकालीन चिकित्सा (Emergency Medicine) में यह जीवन और मृत्यु के बीच का सबसे कीमती समय होता है. किसी दुर्घटना, चोट लगने या दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने के बाद का पहला घंटा बेहद खास होता है. इस पहले 1 घंटे के भीतर मरीज को सही और तुरंत इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है. यदि इस दौरान मरीज को अस्पताल पहुंचाकर इलाज शुरू कर दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना सबसे अधिक होती है.

सड़क हादसे में गोल्डन ऑवर (हादसे के बाद के पहले 1 घंटे) के भीतर सही इलाज मिल जाने पर मरीज की जान बचने की संभावना लगभग 50% तक बढ़ जाती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विभिन्न चिकित्सा शोधों के अनुसार, भारत सहित दुनिया भर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में तकरीबन आधी मौतों को केवल समय पर (गोल्डन ऑवर में) प्राथमिक उपचार देकर रोका जा सकता है.

गोल्डन ऑवर में जान बचने की संभावना इतनी अधिक क्यों होती है?

रक्तस्राव पर नियंत्रण: दुर्घटनाओं में अधिकांश मौतें अत्यधिक खून बहने के कारण होती हैं। पहले घंटे में ब्लीडिंग रोकने से मरीज शॉक (सदमे) में जाने से बच जाता है.

सांस की नली (Airway) का प्रबंधन: हादसे के तुरंत बाद ऑक्सीजन की कमी से दिमाग डैमेज होने का खतरा रहता है। शुरुआती मिनटों में श्वास नली को साफ रखने से जान बचाई जा सकती है.

तुरंत कैशलेस इलाज: भारत सरकार की PM राहत योजना के तहत, गोल्डन ऑवर में पीड़ितों को अस्पतालों में ₹1.5 लाख तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज दिया जाता है, जिससे पैसों की कमी के कारण इलाज में देरी नहीं होती.

धनबाद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में इस योजना के लिए राशि उपलब्ध होने के बावजूद मददगारों की पहचान और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी है. कई मामलों में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति का नाम तक दर्ज नहीं किया जाता. ऐसे में जान बचाने वाले लोग सम्मान और प्रोत्साहन राशि से वंचित रह जाते हैं.

बढ़ते सड़क हादसे और मौतें

धनबाद में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है. हर गुजरते महीने के साथ दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या चिंताजनक होती जा रही है. जनवरी 2025 से लेकर मार्च 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि जिले में 494 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 313 लोगों की जान चली गई, जबकि 161 लोग घायल हुए. ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि धनबाद की सड़कें अब लोगों के लिए सुरक्षित नहीं रह गई हैं.

Good Samaritan Scheme in Dhanbad

क्या कहते हैं 2025 के आंकड़े

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ वर्ष 2025 में ही जिले में 391 सड़क हादसे हुए. इनमें 240 लोगों की मौत हुई, जबकि 135 लोग गंभीर रूप से घायल हुए. यानी औसतन हर डेढ़ दिन में एक व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत हुई.ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर तमाम दावों और जागरूकता अभियानों के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है.

2026 के शुरुआती तीन महीने चिंताजनक

वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. जनवरी से मार्च 2026 के बीच 103 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं. इन हादसों में 73 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं.यानी नए वर्ष के केवल तीन महीनों में ही मौत का आंकड़ा 70 के पार पहुंच जाना इस बात का संकेत है कि यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में स्थिति और भयावह हो सकती है.

Good Samaritan Scheme in Dhanbad

कितनी हुई मानवीय क्षति

जनवरी 2025 से 15 मार्च 2026 तक कुल 494 सड़क दुर्घटनाओं में 313 लोगों की जान गई. यह संख्या कई छोटे कस्बों की आबादी के बराबर है. हर आंकड़े के पीछे एक परिवार का उजड़ना, बच्चों के सिर से पिता का साया उठना और किसी घर का चिराग बुझ जाना छिपा है.सड़क हादसे सिर्फ आंकड़े नहीं होते, बल्कि वे उन परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल देते हैं, जिनके अपने लोग इन दुर्घटनाओं का शिकार बनते हैं.

उपायुक्त का बयान

उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि पहले लोग सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने से डरते थे. उन्हें आशंका रहती थी कि कहीं वे कानूनी प्रक्रिया में न उलझ जाएं. इसी डर को खत्म करने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को मदद के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने ‘गुड सेमेरिटन’ योजना शुरू की है.

Good Samaritan Scheme in Dhanbad

उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को सम्मान के रूप में प्रोत्साहन राशि दी जानी है. फिलहाल धनबाद में ऐसे लोगों की पहचान व्यवस्थित रूप से नहीं हो सकी है. इसके लिए अब विशेष पहल की जाएगी. जिले के सभी ब्लैक स्पॉट के आसपास रहने वाले लोगों को जागरूक किया जाएगा, ताकि वे हादसे के समय तुरंत मदद करें और उन्हें योजना का लाभ मिल सके. अगले सड़क सुरक्षा सप्ताह से ऐसे मददगारों को चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

सिविल सर्जन का बयान

सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा ने बताया कि ‘गुड सेमेरिटन’ योजना के तहत गोल्डन ऑवर में घायल की जान बचाने वाले लोगों को 2 हजार और 5 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जानी है. इसके लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को राशि उपलब्ध करा दी गई है.

उन्होंने कहा कि अब तक दी गई राशि और लाभुकों की विस्तृत रिपोर्ट सिविल सर्जन कार्यालय को प्राप्त नहीं हुई है. इसी कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कितने लोगों को इस योजना का लाभ मिला है.

सामाजिक संस्था का दृष्टिकोण

ह्यूमैनिटी हेल्पिंग हैंड्स संस्था के संस्थापक गौतम मंडल ने कहा कि उनकी संस्था लगातार सड़क हादसों में घायल लोगों को गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने का काम कर रही है. अब तक संस्था के सदस्य सैकड़ों घायलों को समय पर इलाज दिलाने में सफल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें योजना का लाभ देना चाहिए, ताकि समाज में जागरूकता बढ़े और अधिक लोग आगे आकर घायल व्यक्तियों की मदद करें. गौतम मंडल ने कहा कि यदि उन्हें स्वयं इस योजना का लाभ नहीं मिला है, तो यह मानना कठिन है कि अन्य लोगों को लाभ मिला होगा. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी संस्था का उद्देश्य पुरस्कार लेना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की जान बचाना है.

‘गुड सेमेरिटन’ योजना का उद्देश्य

‘गुड सेमेरिटन’ योजना का उद्देश्य सड़क हादसों में घायल लोगों की जान बचाने वाले नागरिकों को सम्मानित करना और अधिक से अधिक लोगों को मदद के लिए प्रेरित करना है. लेकिन धनबाद में यह योजना अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी है. एक ओर जनवरी 2025 से मार्च 2026 तक 494 सड़क हादसों में 313 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर गोल्डन ऑवर में घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार अब भी सरकारी प्रोत्साहन और सम्मान से वंचित हैं.

प्रशासन का कहना है कि अब ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने भी दावा किया है कि योजना के लिए राशि उपलब्ध है. वहीं सामाजिक संस्थाओं का मानना है कि यदि मददगारों को समय पर सम्मान और प्रोत्साहन मिले, तो अधिक लोग आगे आएंगे और कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकेंगी.