हेमंत सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की मांगों पर बढ़ाया कदम, वेतन विसंगति और सेवा संबंधी विवादों की होगी समीक्षा
Ranchi: झारखंड सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देने की दिशा में कदम उठाते हुए वेतन विसंगति, प्रोन्नति (Promotion) और सेवा संबंधी लंबित मामलों के समाधान के लिए एक हाईलेवल कमेटी का गठन किया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर गठित यह समिति विभिन्न विभागों में वर्षों से लंबित कर्मचारियों की समस्याओं की समीक्षा कर समाधान सुझाएगी.
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सरकार के अनुसार, समिति कर्मचारियों की वेतन विसंगति, समयबद्ध प्रोन्नति, सेवा शर्तों और अन्य प्रशासनिक विवादों की विस्तृत जांच करेगी. इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे. वित्त विभाग के द्वारा जारी पत्र के अनुसार सदस्य राजस्व पर्षद की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के पांच सेवानिवृत्त पदाधिकारियों को इस कमेटी में बतौर सदस्य बनाया गया है.
वित्त सचिव प्रशांत कुमार के हस्ताक्षर से जारी वित्त विभाग के पत्र के अनुसार राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति में भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह, राज्य प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी ओम प्रकाश साह, राज्य पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी राज नारायण सिंह, राज्य शिक्षा सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी जयंत कुमार मिश्रा, राज्य अभियंत्रण सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी उमेश मेहता को शामिल किया गया है.
यह उच्चस्तरीय समिति समय-समय पर राज्य की विभिन्न सेवा संघों द्वारा उठाई गई वेतन विसंगति विभिन्न सेवाओं की सेवा शर्तों में एकरूपता लाने और एमएसीपी संबंधी मामलों का निराकरण के संबंध में सुझाव और अनुशंसा राज्य सरकार को देने का काम करेगी.
राज्य सरकार द्वारा वेतन विसंगति, एमएसीपी सहित अन्य मामलों के समाधान के लिए उच्चस्तरीय समिति के गठन का निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर 2024 को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया था. कर्मचारी संगठनों के द्वारा लगातार मुख्यमंत्री के समक्ष वेतन विसंगति को लेकर मांग होती रही थी.
इधर, उच्चस्तरीय समिति के गठन का झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ ने स्वागत किया है. महासंघ के उपाध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने कहा है कि इसको लेकर विभिन्न मंचों पर सरकार से यह मांग की जा रही थी, जिसे देर से ही सही इस ओर अब पहल की गई है. बिहार से अलग होकर झारखंड गठन के बाद यहां पदस्थापित कर्मचारियों की समस्या अलग-अलग हैं. वेतन विसंगति से लेकर प्रोन्नति और एमएसीपी का मुद्दा उच्चस्तरीय समिति के माध्यम से सुलझाने का मार्ग प्रशस्त होगा.
उन्होंने कहा कि आज भी राज्य सरकार के विभिन्न कार्यालय में कार्यरत चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों का तृतीय वर्ग में प्रोन्नति का मामला लटका हुआ है, जबकि बिहार में यह बहुत पहले हो चुका है. इसी तरह वेतन विसंगति भी बड़े पैमाने पर है, जिसे दूर किया जाएगा. उन्होंने सरकार द्वारा की गई इस पहल की सराहना की.







