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Hemant Soren Land Case: 8.86 एकड़ जमीन मामले में हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, अब क्या होगा?

Ranchi:  बड़गांई की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल हस्तक्षेप याचिका पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.
 
JHARKHAND

Ranchi: बड़गांई की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल हस्तक्षेप याचिका (IA) पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

बड़गाईं जमीन मामला: CM हेमंत सोरेन की याचिका पर हाईकोर्ट ने ED से मांगा  जवाब, अगली सुनवाई 16 सितंबर को

हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल याचिका में रांची की विशेष पीएमएलए अदालत के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई है, जिसमें उनकी डिस्चार्ज पिटीशन खारिज कर दी गई थी। साथ ही निचली अदालत में चल रही आगे की आपराधिक कार्यवाही पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।

19 सितंबर तक रोक लगाने की मांग

मुख्यमंत्री की ओर से दायर IA में विशेष पीएमएलए अदालत के डिस्चार्ज पिटीशन खारिज करने वाले आदेश पर 19 सितंबर तक रोक लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा ट्रायल कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को भी रोकने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरव कुमार ने अपना पक्ष रखा। वहीं, हेमंत सोरेन की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलीलें पेश कीं।

8 जून को खारिज हुई थी डिस्चार्ज पिटीशन

मामले में रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने 8 जून 2026 को हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज पिटीशन खारिज कर दी थी। निचली अदालत के आदेश के अनुसार, उस स्तर पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला आगे बढ़ाने का आधार मौजूद था।

इसके बाद हेमंत सोरेन ने हाईकोर्ट का रुख किया और निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी। उनकी ओर से आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में आदेश रद्द करने के साथ मामले में चल रही आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई है।

ED की ओर से इस मामले में जमीन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। हाईकोर्ट के पुराने रिकॉर्ड में ED ने बड़गांई क्षेत्र में करीब 8.86 एकड़ जमीन को लेकर दस्तावेजों और कथित कब्जे से संबंधित सामग्री का उल्लेख किया था।

9 सितंबर को ED से मांगा गया था जवाब

इस मामले की पिछली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को हुई थी। उस दौरान ED की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया था, जिसे अदालत ने स्वीकार किया था। अदालत ने मामले को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।

बुधवार की सुनवाई में ED की ओर से अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा गया। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।

14 आरोपियों के खिलाफ हो चुका है आरोप गठन

बड़गांई जमीन मामले में ED की विशेष अदालत पहले ही 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन कर चुकी है। इनमें पूर्व राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, तापस घोष, शेखर कुशवाहा, मोहम्मद सद्दाम हुसैन, अफसर अली, मोहम्मद इरशाद अख्तर, कुमार राजश्री, मनोज कुमार यादव, प्रियरंजन सहाय, विपिन सिंह, विजेंद्र सिंह और संजीत कुमार शामिल हैं।

मामले में ED ने पहले आरोप लगाया था कि जमीन से संबंधित रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और अवैध तरीके से जमीन के अधिग्रहण तथा कब्जे से जुड़े साक्ष्य जांच के दौरान सामने आए। ये आरोप जांच एजेंसी के हैं और मामले की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।

अब हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार

हेमंत सोरेन की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अब सभी की नजर हाईकोर्ट के आदेश पर है। अदालत का आदेश यह तय करेगा कि विशेष पीएमएलए अदालत के आदेश और आगे की आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक को लेकर क्या स्थिति बनती है।