यौन अपराधों पर हाईकोर्ट गंभीर, जांच से लेकर पुनर्वास तक के लिए जारी की विस्तृत गाइडलाइन
Ranchi: यौन हिंसा के मामलों में पीड़ितों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करने को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है. अदालत ने संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों को 19 महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों का उद्देश्य पीड़ितों को बेहतर सुरक्षा, त्वरित न्याय और संवेदनशील माहौल उपलब्ध कराना है.
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हाईकोर्ट ने कहा कि यौन हिंसा के मामलों में पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. अदालत ने पुलिस और जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करें और जांच प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करें.
कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़ितों और उनके परिवारों को किसी प्रकार की धमकी, दबाव या प्रताड़ना का सामना न करना पड़े, इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. साथ ही पीड़ितों को कानूनी सहायता, काउंसलिंग और पुनर्वास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया.
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अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में लंबित जांच और मुकदमों की नियमित समीक्षा की जाए. इसके अलावा पीड़ितों के बयान दर्ज करने, मेडिकल जांच कराने और साक्ष्य संग्रह की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और मानवीय बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं.
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यौन हिंसा के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती है. इसलिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर काम करने और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.
अदालत के इस कदम को पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से यौन हिंसा के मामलों में पीड़ितों को बेहतर संरक्षण और न्याय मिलने में मदद मिलेगी.







