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हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति मामले में फिर तेज हुई सुनवाई, JSSC को संशोधित मेरिट लिस्ट पेश करने का निर्देश

 
हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति मामले में फिर तेज हुई सुनवाई, JSSC को संशोधित मेरिट लिस्ट पेश करने का निर्देश

 

Ranchi, Jharkhand News: झारखंड में हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति 2016 मामले को लेकर गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने शनिवार को ऑनलाइन सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को विषयवार और कोटिवार संशोधित स्टेट वाइज मेरिट लिस्ट पेश करने का निर्देश दिया गया।

कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा 2016 से जुड़ी नियुक्तियों के मामले की सुनवाई की। हालांकि, इस दौरान JSSC और राज्य सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि कमीशन के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ।

याचिकाकर्ता की ओर से रखा गया पक्ष

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने अपना पक्ष रखा। उनके मुताबिक, मामले की अगली सुनवाई 26 सितंबर को निर्धारित की गई है। इसके बाद 4 अक्टूबर से मामले में प्रतिदिन सुनवाई किए जाने का निर्णय लिया गया है।

अधिवक्ता ललित कुमार सिंह ने बताया कि 4 अक्टूबर से होने वाली रोजाना सुनवाई में प्रार्थियों की ओर से दाखिल दावा याचिकाओं पर विचार किया जाएगा। ऐसे में इस मामले से जुड़े अभ्यर्थियों की नजर अब आगे होने वाली सुनवाई पर टिकी है।

16 सितंबर को हाईकोर्ट में भी सुनवाई

मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव 16 सितंबर को है। उस दिन झारखंड हाईकोर्ट में सरकार और JSSC की ओर से दाखिल एलपीए पर सुनवाई होनी है। हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति विवाद से जुड़े अभ्यर्थियों और पक्षकारों की नजर इस सुनवाई के नतीजे पर भी बनी हुई है।

17,786 पदों पर शुरू हुई थी नियुक्ति प्रक्रिया

बता दें कि JSSC ने वर्ष 2016 में हाईस्कूल शिक्षकों के 17,786 पदों पर नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। शुरुआत से ही यह नियुक्ति प्रक्रिया विवादों और कानूनी पेच में फंसी रही।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर JSSC ने 26 विषयों की स्टेट मेरिट लिस्ट और कटऑफ जारी की थी। नियुक्ति प्रक्रिया में जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय मेरिट को आधार बनाया गया।

इसी प्रक्रिया को लेकर कुछ अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि कई ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक हासिल किए, लेकिन इसके बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी। ऐसे अभ्यर्थी अब नियुक्ति की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अब संशोधित स्टेट वाइज मेरिट लिस्ट और आगामी सुनवाई से इस मामले में आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।