Newshaat_Logo

Hindi Diwas 2026: एटीआई सभागार में खास आयोजन, व्याख्यान और काव्यपाठ से सजेगी साहित्यिक शाम

Ranchi: हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर एटीआई सभागार में विशेष साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा की महत्ता और वर्तमान समय में उसकी भूमिका पर व्याख्यान होगा. इसके साथ ही काव्यपाठ का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे. आयोजन का उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रति लोगों में जागरूकता और सम्मान की भावना को बढ़ावा देना है.
 
JHARKHAND

Ranchi: हिंदी दिवस के अवसर पर झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से एटीआई (Administrative Training Institute) सभागार में भव्य व्याख्यान एवं काव्यपाठ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सरकारी कामकाज में हिंदी के अधिक से अधिक और सही भावना के साथ इस्तेमाल पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आम लोगों तक शासन की योजनाओं और सेवाओं की पहुंच आसान बनाने में सरल और स्पष्ट भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका है।

HINDI DIWAS

सरल हिंदी और पारदर्शी व्यवस्था सुशासन की पहचान: प्रवीण टोप्पो

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभागीय सचिव प्रवीण टोप्पो ने कहा कि सुशासन की वास्तविक पहचान सरल हिंदी, सुगम प्रक्रियाओं और पारदर्शी व्यवस्था से होती है। जब सरकारी कामकाज की भाषा आम नागरिकों की समझ में आती है, तो सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचता है।

उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यालयीन कार्यों में अनावश्यक जटिल शब्दों और प्रक्रियाओं को कम करने की अपील की। उनका कहना था कि नागरिकों के लिए सरकारी प्रक्रियाओं को जितना आसान बनाया जाएगा, शासन और जनता के बीच भरोसा उतना ही मजबूत होगा।

तकनीक के इस्तेमाल से बढ़ रही पारदर्शिता

प्रवीण टोप्पो ने कहा कि सरकारी व्यवस्था में तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है। ऑनलाइन सेवाओं, समयबद्ध निस्तारण और शिकायतों की निगरानी जैसी व्यवस्थाओं से सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रत्येक निर्णय और प्रक्रिया की निगरानी आसान हो रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों को जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरल भाषा और स्पष्ट कार्यशैली अपनानी चाहिए, ताकि शासन व्यवस्था जनता के और करीब आ सके।

हिंदी जनसरोकार और सांस्कृतिक एकता का माध्यम

एटीआई सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने हिंदी को केवल भाषा नहीं, बल्कि जनसरोकार और सांस्कृतिक एकता का सशक्त माध्यम बताया। वक्ताओं ने हिंदी को ‘बोली और भाषा के बीच का आत्मसमर्पण’ बताते हुए कहा कि यह देश की विभिन्न लोक भाषाओं और बोलियों को आत्मसात करते हुए लगातार समृद्ध होती रही है।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों की बोलियों और लोक भाषाओं से शब्दों को अपनाने की क्षमता हिंदी को जन-जन से जोड़ती है। यही विविधता हिंदी को व्यापक स्वरूप प्रदान करती है।

काव्यपाठ में सामाजिक सरोकार और राष्ट्रभक्ति की झलक

कार्यक्रम के दौरान आयोजित काव्यपाठ में कवियों ने सामाजिक सरोकार, राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन विषयों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं। कविताओं को उपस्थित श्रोताओं ने खूब सराहा।

वक्ताओं ने कहा कि हिंदी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और आज भी यह देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने हिंदी के विकास में लोक भाषाओं और क्षेत्रीय बोलियों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।

भविष्य की भाषा के रूप में हिंदी को विकसित करने पर जोर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वैश्विक स्तर पर हिंदी का स्वरूप लगातार बदल और विकसित हो रहा है। विभिन्न भाषाओं के शब्दों का समावेश हिंदी को नया विस्तार दे रहा है।

उन्होंने कहा कि हिंदी को सिर्फ अतीत की विरासत के तौर पर देखने के बजाय भविष्य की भाषा के रूप में विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए सरकारी कामकाज, शिक्षा, तकनीक और जनसंचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी के प्रभावी और सरल इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।