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धनबाद में निकाय चुनाव को लेकर जुबानी जंग तेज, बीजेपी सांसद और मेयर प्रत्याशी ने एक दूसरे पर बोला हमला...

Dhanbad: भाजपा अपने समर्थित मेयर प्रत्याशी संजीव अग्रवाल के समर्थन में पूरी ताकत झोंक रही है. पार्टी के सांसद ढुल्लू महतो, विधायक राज सिन्हा समेत कई पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार क्षेत्र में दौरा कर जनसमर्थन जुटा रहे हैं.
 
Jharkhand

Dhanbad: नगर निकाय चुनाव का राजनीतिक पारा लगातार चढ़ता जा रहा है. चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी ने मेयर पद के लिए संजीव अग्रवाल को समर्थन दिया है. वहीं झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह पार्टी से बगावत कर मेयर चुनाव लड़ रहे हैं. इसी बीच भाजपा के भीतर ही जुबानी जंग तेज हो गई है.

सांसद ढुल्लू महतो बिना नाम लिए ही माफिया शब्द का मंच से संबोधन करते नजर आ रहे हैं. वहीं दूसरी ओर मेयर प्रत्याशी संजीव सिंह भी इशारा करते हुए डॉक्टर से इलाज की सलाह दे रहें हैं.

भाजपा अपने समर्थित मेयर प्रत्याशी संजीव अग्रवाल के समर्थन में पूरी ताकत झोंक रही है. पार्टी के सांसद ढुल्लू महतो, विधायक राज सिन्हा समेत कई पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार क्षेत्र में दौरा कर जनसमर्थन जुटा रहे हैं.
इसी बीच भाजपा सांसद ढुल्लू महतो ने बिना नाम लिए मेयर प्रत्याशी संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग चुनाव मैदान में हैं. अगर वे गलती से जीत गए तो धनबाद की शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
उन्होंने कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया, जिससे सियासी माहौल और गर्म हो गया है.
सांसद के इस बयान पर मेयर प्रत्याशी संजीव सिंह ने भी तीखा पलटवार किया.
उन्होंने कहा कि जनता का भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है और साढ़े आठ साल बाद सक्रिय राजनीति में लौटने पर लोगों का समर्थन कुछ लोगों को रास नहीं आ रहा.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, वे डॉक्टर से सलाह लें और दवा खाएं. संजीव सिंह ने कहा कि जनता के बीच बढ़ते समर्थन से कुछ लोग चिंतित हैं कि कहीं भविष्य में बदलाव न हो जाए.
मेयर प्रत्याशी संजीव सिंह और सांसद ढुल्लू महतो के बीच आरोप–प्रत्यारोप की यह जंग अब खुलकर सामने आ चुकी है. मंच से लेकर मीडिया और सोशल मीडिया तक दोनों खेमों के समर्थकों के बीच बहस तेज हो गई है.
अब देखना यह होगा कि यह सियासी टकराव केवल चुनावी रणनीति साबित होती है या कोयलांचल की राजनीति की दिशा तय करने वाला मोड़ बनता है.