JSSC पेपर लीक का नेटवर्क कितना बड़ा? अभय तिवारी, भाई-पत्नी से फिर पूछताछ, कई राज खुलेंगे!
Ranchi: JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही CID ने मुख्य आरोपित अभय तिवारी से एक बार फिर लंबी पूछताछ की है।रिमांड पर लिए गए अभय तिवारी से रविवार को साइबर थाने में जांच टीम ने कई अहम बिंदुओं पर सवाल-जवाब किए।
अभय तिवारी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम करता था और इस मामले में उसे मुख्य आरोपितों में शामिल किया गया है। CID अब उसके पुराने बयानों और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों का मिलान कर रही है, ताकि कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
पुराने बयानों और सबूतों का मिलान
जांच टीम का फोकस इस बात पर है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या उससे संबंधित जानकारी किस तरह और किन लोगों तक पहुंची। इसके लिए CID अभय तिवारी से पहले हुई पूछताछ के दौरान दिए गए बयानों को दोबारा खंगाल रही है।
जांच अधिकारियों को अब तक मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अभय से कई सवाल पूछे गए। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित पेपर लीक की योजना में कौन-कौन लोग शामिल थे और नेटवर्क का संचालन किस स्तर से किया जा रहा था।
भाई और पत्नी से भी अलग-अलग पूछताछ
अभय तिवारी के अलावा उसके भाई अक्षय कुमार तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी से भी अलग-अलग पूछताछ की जा रही है।
CID यह भी जांच कर रही है कि दोनों का JSSC CGL परीक्षा और कथित पेपर लीक नेटवर्क से कोई संबंध था या नहीं। पूछताछ के दौरान उनके परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य संबंधित जानकारियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
18 अन्य लोगों से पहले हो चुकी है पूछताछ
इस मामले में CID की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। जांच एजेंसी इससे पहले 18 अन्य संदिग्धों और मामले से जुड़े लोगों से पूछताछकर चुकी है।
इन पूछताछ के जरिए जांच टीम कथित पेपर लीक से जुड़े लोगों की पहचान करने और उनके बीच संपर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
पेपर लीक नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश
CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या उसके उत्तर से जुड़ी जानकारी किसके पास पहुंची, इसे आगे किसने साझा किया और इसमें कितने लोगों की भूमिका थी।
जांच एजेंसी पुराने बयानों, पूछताछ से मिली जानकारी और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों का आपस में मिलान कर रही है। आने वाले दिनों में पूछताछ के आधार पर मामले में और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना है।
फिलहाल CID की जांच जारी है और एजेंसी कथित JSSC CGL पेपर लीक नेटवर्क की पूरी कड़ी को सामने लाने की कोशिश कर रही है।
अभय के बयान से परीक्षा धांधली के खुले राज
अभय की भूमिका को अहम माना जा रहा है. उसके पूर्व के पूछताछ में दिए गए बयान में परीक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं. उसके अनुसार, टीडीपीएल को परीक्षा संचालन से हटाये जाने और जिम्मेदारी वेबल एजेंसी को दिये जाने के दौरान उसका संपर्क वेबल से जुड़े उमाकांत प्रमाणिक हुआ था. इसी संपर्क के जरिये परीक्षा से पहले उत्तर हासिल करने का दावा किया गया है. जांच में यह भी सामने आया है कि अभय का भाई अक्षय और पत्नी सुषमा भी परीक्षा में सफल हुए थे. दोनों की गिरफ्तारी के बाद सीआइडी तीनों को कभी एक साथ, तो कभी अलग-अलग बैठाकर पूछताछ कर रही है. अभय ने पूर्व में बताया था कि बोकारो के एक क्वार्टर को ठिकाना बनाकर 16 लोगों को परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर रटाये गये थे. इस दौरान मिथिलेश सिंह और राकेश सिंह की मौजूदगी की बात भी सामने आयी है. आरोप है कि 65 प्रश्नों के उत्तर पहले ही उपलब्ध करा दिये गये थे और इसके लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से 12 लाख रुपये लिये गये. इसी के सहारे अभय ने 48वीं रैंक हासिल की थी.
मो एबाद का लिया गया बयान, श्वेता पर भी आरोप
एक अन्य आरोपित मो एबाद के बयान से जांच की एक और कड़ी सामने आयी है. इसमें जेपीएससी की परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता पर अभय और अन्य आरोपितों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया गया है. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के स्तर पर होना बाकी है. सीआइडी अब इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है. जांच एजेंसी फिलहाल दो स्तरों पर काम कर रही है. एक ओर प्रश्नपत्र के उत्तर उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थियों को इस नेटवर्क तक पहुंचाने वाले एजेंटों की भूमिका खंगाली जा रही है. सरकार विवादित सीजीएल परीक्षा को पहले ही रद्द कर चुकी है. अब सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में गड़बड़ी की शुरुआत कहां से हुई, उत्तर कितने अभ्यर्थियों तक पहुंचे और इस पूरे मामले में पैसों का लेनदेन किन-किन लोगों के माध्यम से हुआ.







