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चाईबासा में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना, नवजात के शव को डिब्बे में रखकर घर ले गया मजबूर पिता...

Chaibasa: पीड़ित पिता ने बच्चे के शव को गांव तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस या किसी वाहन की व्यवस्था करने की मांग की, लेकिन परिजनों के अनुसार अस्पताल की ओर से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई. मजबूरी में पिता ने पास में पड़े एक खाली कार्डबोर्ड के डिब्बे में अपने नवजात के शव को रखा और उसी में लेकर गांव के लिए निकल पड़ा.
 
Chakradharpur Hospital News

Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल से मानवता को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है. आरोप है कि अस्पताल से किसी प्रकार की मदद नहीं मिलने पर एक गरीब पिता को अपने नवजात बच्चे का शव कार्डबोर्ड के डिब्बे में रखकर गांव ले जाना पड़ा. इस घटना के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

जानकारी के अनुसार, सराईकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव निवासी रामकृष्ण हेंब्रम अपनी पत्नी रीता तिरिया को प्रसव के लिए कुछ दिन पहले चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल लेकर आए थे. शनिवार को महिला ने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ ही देर बाद नवजात की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत बिगड़ने के बावजूद अस्पताल की ओर से समुचित देखभाल नहीं की गई. उनका कहना है कि नवजात की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने परिवार को किसी प्रकार की मदद नहीं दी और शव को जल्द अस्पताल से ले जाने के लिए कहा.

पीड़ित पिता ने बच्चे के शव को गांव तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस या किसी वाहन की व्यवस्था करने की मांग की, लेकिन परिजनों के अनुसार अस्पताल की ओर से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई. मजबूरी में पिता ने पास में पड़े एक खाली कार्डबोर्ड के डिब्बे में अपने नवजात के शव को रखा और उसी में लेकर गांव के लिए निकल पड़ा.

एक पिता को अपने नवजात के शव को इस तरह ले जाते देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं. घटना की जानकारी इलाके में फैलते ही ग्रामीणों में आक्रोश भी देखा गया. ग्रामीणों का कहना है कि यदि अस्पताल प्रबंधन चाहता तो मानवीय आधार पर शव को सम्मानपूर्वक घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती थी. ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. साथ ही परिवार को आर्थिक सहायता देने की भी मांग उठाई गई है.

इधर, अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. अंशुमन शर्मा ने कहा कि पीड़ित परिवार ने शव ले जाने के लिए अस्पताल से किसी प्रकार की मदद नहीं मांगी थी. उनका कहना है कि यदि अस्पताल को इसकी जानकारी दी जाती तो ममता वाहन के माध्यम से शव को घर तक भेजने की व्यवस्था की जा सकती थी. उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन मरीजों को हरसंभव सुविधा देने का प्रयास करता है और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.