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क्या अभी भी गठबंधन में है एडजस्ट की संभावना? क्या झारखंड में बिखर जाएगा महागठबंधन? JMM नेताओं के बयान से गरमाई सियासत

Jharkhand Desk: झामुमो ने बिहार की 6 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है. जिनमें चकाई, धमदाहा, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती शामिल है. इसके साथ ही झामुमो आज शाम भी उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर सकता है. जेएमएम चार और विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों को उतारने की योजना को अंतिम रूप देने में लगा है.
 
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Jharkhand Desk: बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद से ही ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि झामुमो की बिहार में चुनावी राजनीति में क्या भूमिका होगी? शनिवार शाम झामुमो की ओर से राजद पर राजनीतिक धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए पार्टी महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बिहार की छह विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी. इसके साथ ही यह भी ऐलान किया गया कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद झारखंड में महागठबंधन की समीक्षा की जाएगी.

राजद और झामुमो के रिश्तों में खटास!

झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्या के बयान के बाद अब ऐसे कयास लगने शुरू हो गए हैं कि झारखंड में हेमंत कैबिनेट की सूरत कहीं बदलने वाली तो नहीं है? ईटीवी भारत ने झारखंड की राजनीति में शुरू हुए इन कयासों पर सत्ताधारी महागठबंधन के तीनों मुख्य दल झामुमो, कांग्रेस और राजद के नेताओं के विचार जानने की कोशिश की तो इनके बयानों से ऐसा प्रतीत हुआ कि ये भले ही अभी इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं लेकिन बिहार चुनाव के बीच कम से कम राजद और झामुमो के रिश्ते में खटास जरूर आ गई है.

रहीम से लेकर राष्ट्रकवि दिनकर तक की कविता का सहारा लेकर झामुमो ने राजद के साथ आई रिश्तों में खटास की ओर इशारा किया था. उन्होंने राष्ट्रकवि दिनकर को कोट करते हुए कहा कि 'याचना नहीं अब रण होगा भीषण महासंग्राम होगा'. सुप्रियो भट्टाचार्य यहीं नहीं रुके, जब ईटीवी भारत ने उनसे पूछा कि क्या अब यह वक्त आ गया है कि झारखंड में राजद को महागठबंधन से बाहर कर दिया जाए, इस सवाल के जवाब में झामुमो के केंद्रीय महासचिव ने कहा कि बिहार चुनाव के बाद इसकी समीक्षा होगी. उन्होंने कुछ दिन पहले राजद के राज्यसभा सांसद द्वारा कहे गए रहीम के दोहे को फिर से दोहराया, जो इस ओर इशारा करता है कि झारखंड में महागठबंधन के अंदर गांठ तो पड़ ही गई है.

झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि हमने राजद को झारखंड में सम्मान दिया, हमारे स्टार प्रचारकों की बदौलत ही उनके चार एमएलए हैं. राजद को महागठबंधन में जगह मिलेगी या फिर बाहर किया जाएगा, इस पर पार्टी के बड़े नेताओं को समीक्षा के बाद फैसला लेना है लेकिन यह बात तो तय है कि हमारे बीच रिश्तों में खटास तो आ ही गई है, गांठ भी पड़ ही गई है.

झारखंड में एक दूसरे के सहयोग से चल रही है सरकार: राजद

वहीं राजद के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश यादव ने झामुमो की ओर से दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कीमत चुकाने की बात कहां से आती है? राज्य में एक दूसरे के सहयोग से सरकार चल रही है. हमारी अलग पार्टी है, उनकी अलग पार्टी है, इसमें धमकी वाली बात कहां से आती है? जब से पार्टी बनीं है तब से हमारा झारखंड में मजबूत आधार रहा है. राजद पर धोखा देने का आरोप न लगाएं क्योंकि हमने भी झामुमो नेताओं से, झारखंड विधानसभा चुनाव में 22 सीट की मांग की थी और कहां हमें उतनी सीटें मिलीं. कैलाश यादव ने बताया कि झारखंड में किसी एक दल की सरकार नहीं चल रही है, इसलिए जेएमएम के नेताओं को सोच समझ कर बोलना चाहिए.

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड में महागठबंधन के दो दल राजद और झामुमो के बीच रिश्तों में आई खटास पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश सिन्हा यह कोशिश करते दिखे कि दोनों दल (राजद-झामुमो) के बीच की कड़वाहट और न बढ़े. उन्होंने कहा कि बिहार में झामुमो का स्वभाविक दावा बनता है अगर जेएमएम साथ होता तो गठबंधन और मजबूत होता.

उन्होंने कहा कि गठबंधन के संयोजक तेजस्वी यादव को बनाया गया है, ऐसे में अभी भी उम्मीद है कि JMM को महागठबंधन में एडजस्ट किया जा सकता है, राजद इस पर गंभीर होगा. उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई किसी को धोखा नहीं देता और हमारा गठबंधन तो एक स्वभाविक गठबंधन है.

झामुमो ने बिहार की 6 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है. जिनमें चकाई, धमदाहा, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती शामिल है. इसके साथ ही झामुमो आज शाम भी उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर सकता है. जेएमएम चार और विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों को उतारने की योजना को अंतिम रूप देने में लगा है.

राजनीति हलचल पर टिकी सबकी निगाहें

इन सब के बीच अब बिहार विधानसभा चुनाव के साथ-साथ सबकी नजरें 14 नवंबर यानी मतगणना के बाद की राजनीति हलचल पर टिकी होगी कि क्या महागठबंधन को लेकर समीक्षा के बाद राजद को झारखंड में महागठबंधन से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा या फिर हेमंत सोरेन भविष्य की राजनीति को समझते हुए राजद को अपने साथ लेकर चलेंगे. अगर राजद को झारखंड में महागठबंधन से बाहर किया जाता है तो राजद कोटे से सरकार में शामिल श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव की कुर्सी जा सकती है.