जेल ने बहुत कुछ सिखाया…: मनी लॉन्ड्रिंग केस से बाहर आते ही आलमगीर आलम का बड़ा ऐलान, 2029 चुनाव नहीं लड़ेंगे
मीडिया से बातचीत के दौरान आलमगीर आलम ने कहा कि आखिरी बार चुनाव जीतकर मंत्री बनने के बाद ही उन्होंने तय कर लिया था कि अब वे सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बनाएंगे और समाज सेवा पर ध्यान देंगे। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीति में परिस्थितियां कब बदल जाएं, यह कहना मुश्किल होता है।
पूर्व मंत्री ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी पद पाने के लिए “दरबारी राजनीति” नहीं की। उन्होंने कहा, “मैंने जिंदगी में कभी मंत्री, स्पीकर या विधायक बनने के लिए किसी के आगे-पीछे नहीं किया।”
जेल में बिताए समय को लेकर आलमगीर आलम भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि बुरा वक्त इंसान को बहुत कुछ सिखा देता है। “जब इंसान मुश्किल में होता है, तभी पता चलता है कि कौन अपना है और कौन पराया। जेल के दो सालों ने मुझे जिंदगी की सबसे बड़ी सीख दी है।”
भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के उस बयान पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि आलमगीर आलम अभी “बाइज्जत बरी” नहीं हुए हैं, बल्कि केवल अंतरिम जमानत पर बाहर आए हैं। इस पर आलमगीर ने संयमित जवाब देते हुए कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत सोच है और जब अदालत से पूरी तरह बरी हो जाएंगे, तब इस मुद्दे पर विस्तार से जवाब देंगे।
महागठबंधन में चल रही खींचतान और भविष्य की राजनीति को लेकर उन्होंने कहा कि जल्द ही पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर वर्तमान हालात की समीक्षा की जाएगी और उसी के आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।
अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आलमगीर आलम ने कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने जनता का आभार जताते हुए कहा कि दो साल जेल में रहने के बावजूद लोगों ने उन्हें भुलाया नहीं। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि उनकी अनुपस्थिति में उनकी पत्नी ने उनसे भी अधिक मतों से चुनाव जीत दर्ज की।
पूर्व मंत्री के इस बयान को झारखंड की राजनीति में एक बड़े भावनात्मक और रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।







