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धनबाद में Japanese Encephalitis का अलर्ट! संक्रमित दोनों बच्चों का नहीं हुआ था टीकाकरण

Dhanbad: जिले में Japanese Encephalitis (JE) के दो मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है. जानकारी के मुताबिक, संक्रमित पाए गए दोनों बच्चों का JE से बचाव के लिए टीकाकरण नहीं हुआ था. स्वास्थ्य विभाग अब प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कर स्थिति का आकलन करेगा. सर्वे के बाद पात्र बच्चों की पहचान कर वैक्सीनेशन अभियान चलाने की तैयारी है.
 
JHARKHAND

Dhanbad:  जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में है। अब तक जिले में दो बच्चों में जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। इनमें बाघमारा प्रखंड के एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि दूसरे बच्चे का इलाज SNMMCH में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, दोनों संक्रमित बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका नहीं लगा था।

Japanese Encephalitis से संक्रमित दोनों बच्चों का नहीं हुआ था टीकाकरण,  धनबाद में सर्वे के बाद चलेगा वैक्सीनेशन अभियान

मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में सर्वे शुरू कर दिया है। इसके साथ ही पूरे जिले में बच्चों के टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। विभाग का उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान करना है, जो नियमित टीकाकरण से छूट गए हैं।

दो बच्चों में JE की पुष्टि

जेई पर वार:बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाएगा नया टीका, बदल गया है  इसका स्वरूप - New Vaccine Will Protect Children From Japanese Encephalitis  In Gorakhpur - Amar Ujala Hindi News Live

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, धनबाद में अब तक दो बच्चों में जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। बाघमारा प्रखंड के एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। वहीं, दूसरे संक्रमित बच्चे का SNMMCH में इलाज चल रहा है। उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

दोनों मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और सर्वे का दायरा बढ़ा दिया है।

प्रभावित इलाकों में शुरू हुआ सर्वे

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विभाग के मुताबिक, दोनों बच्चों का JE टीकाकरण नहीं हुआ था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में सर्वे शुरू किया है। सहिया के माध्यम से घर-घर जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने बच्चे टीकाकरण से वंचित हैं और कितने बच्चे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से बाहर रह गए हैं।

सर्वे में बच्चों की टीकाकरण स्थिति के साथ-साथ अन्य जरूरी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी जुटाई जा रही है।

9 और 16 महीने की उम्र में लगता है JE का टीका

सिविल सर्जन के अनुसार, जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव में टीकाकरण महत्वपूर्ण उपायों में शामिल है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, JE का टीका 9 महीने और 16 महीने की उम्र में लगाया जाता है।

विभाग अब प्रभावित इलाकों के साथ पूरे जिले में यह समीक्षा कर रहा है कि कितने बच्चे निर्धारित उम्र पर टीका लेने से वंचित रह गए हैं। सर्वे पूरा होने के बाद छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष टीकाकरण अभियान या शिविर भी आयोजित किए जा सकते हैं।

साफ-सफाई पर भी स्वास्थ्य विभाग का जोर

जापानी इंसेफेलाइटिस को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से घर और आसपास के इलाके में साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की है। सिविल सर्जन के अनुसार, प्रभावित इलाके के निरीक्षण के दौरान कुछ घरों के आसपास सूअर और बत्तख पाले जाने की जानकारी सामने आई है।

विभाग ने लोगों से पशुओं के शेड को घर से कुछ दूरी पर रखने और आसपास स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया है। साथ ही मच्छरों के पनपने वाली जगहों को खत्म करने की अपील की गई है।

पूरे जिले में होगी टीकाकरण की समीक्षा

सिविल सर्जन आलोक विश्वकर्मा ने कहा कि जापानी इंसेफेलाइटिस का एक मामला सामने आना भी स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर संकेत है। इसी वजह से विभाग केवल प्रभावित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पूरे जिले में बच्चों के टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा कर रहा है।

सर्वे के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि कितने बच्चे निर्धारित टीकों से वंचित हैं। इसके बाद पात्र बच्चों का टीकाकरण कराया जाएगा।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त उपलब्ध हैं टीके

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से बच्चों का नियमित टीकाकरण समय पर कराने की अपील की है। विभाग के मुताबिक, बच्चों को विभिन्न गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए जरूरी टीके सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर नि:शुल्क उपलब्ध हैं।

अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों के टीकाकरण कार्ड को सुरक्षित रखें और निर्धारित समय पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर टीकाकरण कराएं।

क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस?

जापानी इंसेफेलाइटिस एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है। बीमारी की रोकथाम में टीकाकरण के साथ मच्छरों के नियंत्रण और आसपास स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

धनबाद में मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अब सर्वे, टीकाकरण और जागरूकता अभियान पर जोर दे रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि जिले में कितने बच्चे JE टीकाकरण से छूटे हुए हैं और उनके लिए किस स्तर पर विशेष अभियान चलाने की जरूरत है।